Monday, 21 June 2021

नवग्रह शांति अनुष्ठान विधि

 


संसार में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी ग्रह से पीड़ित है। हर व्यक्ति धन-धान्य संपन्न भी नहीं है। ग्रह-पीड़ा के निवारण के लिए निर्धन एवं मध्यम वर्ग का व्यक्ति दुविधा में पड़ जाता है। यह वर्ग न तो लंबे-चौड़े यज्ञ, हवन या अनुष्ठान करवा सकता है, न ही हीरा, पन्ना, पुखराज जैसे महंगे रत्न धारण कर सकता है।  ज्योतिष विद्या देव विद्या है। यदि ज्योतिषियों के पास जाएं तो वे प्रायः पुरातन ग्रंथों में से लिए गए उपाय एवं रत्न धारण करने की सलाह दे देते हैं। परंतु आजकल लोग अनुभव सिद्ध एवं व्यवहारिक उपाय चाहते हैं ताकि आम व्यक्ति, जन सामान्य एवं पीड़ित व्यक्ति लाभ उठा सकें।

ग्रहों की शांति के लिए सरल एवं अचूक उपाय प्रस्तुत हैं- जिसमें लाल किताब के अनुसार व ऋषि पाराशर प्रणीत ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उपाय बताए गए हैं।

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पाराशर एस्ट्रोलॉजी के अनुसार :

1. सूर्य ग्रहों का राजा है। इसलिए देवाधिदेव भगवान् विष्णु की अराधना से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। सूर्य को जल देना, गायत्री मंत्र का जप करना, रविवार का व्रत करना तथा रविवार को केवल मीठा भोजन करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। सूर्य का रत्न 'माणिक्य' धारण करना चाहिए परंतु यदि क्षमता न हो तो तांबे की अंगूठी में सूर्य देव का चिह्न बनवाकर दाहिने हाथ की अनामिका में धारण करें (रविवार के दिन) तथा साथ ही सूर्य के मंत्र का 108 बार जप करें।

ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

2. ग्रहों में चंद्रमा को स्त्री स्वरूप माना है। भगवान शिव ने चंद्रमा को मस्तक पर धारण किया है। चंद्रमा के देवता भगवान शिव हैं। सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं व शिव चालीसा का पाठ करें। 16 सोमवार का व्रत करें तो चंद्रमा ग्रह द्वारा प्रदत्त कष्ट दूर होते हैं। रत्नों में मोती चांदी की अंगूठी में धारण कर सकते हैं। चंद्रमा के दान में दूध, चीनी, चावल, सफेद पुष्प, दही (सफेद वस्तुओं) का दान दिया जाता है तथा मंत्र जप भी कर सकते हैं।

ऊँ सों सोमाय नमः

3. जन्मकुंडली में मंगल यदि अशुभ हो तो मंगलवार का व्रत करें, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ करें। मूंगा रत्न धारण करें या तांबे की अंगूठी बनवाकर उसमें हनुमान जी का चित्र अंकितकर मंगलवार को धारण कर सकते हैं। स्त्रियों को हनुमान जी की पूजा करना वर्जित बताया गया है। मंगल के दान में गुड़, तांबा, लाल चंदन, लाल फूल, फल एवं लाल वस्त्र का दान दें।

ऊँ अं अंगारकाय नमः

4. ग्रहों में बुध युवराज है। बुध यदि अशुभ स्थिति में हो तो हरा वस्त्र न पहनें तथा भूलकर भी तोता न पालें। अन्यथा स्वास्थ्य खराब रह सकता है। बुध संबंधी दान में हरी मूंग, हरे फल, हरी सब्जी, हरा कपड़ा दान-दक्षिणा सहित दें व बीज मंत्र का जप करें।

ऊँ बुं बुधाय नमः

5. गुरु : गुरु का अर्थ ही महान है- सर्वाधिक अनुशासन, ईमानदार एवं कर्त्तव्यनिष्ठ। गुरु तो देव गुरु हैं। जिस जातक का गुरु निर्बल, वक्री, अस्त या पापी ग्रहों के साथ हो तो वह ब्रह्माजी की पूजा करें। केले के वृक्ष की पूजा एवं पीपल की पूजा करें। पीली वस्तुओं (बूंदी के लडडू, पीले वस्त्र, हल्दी, चने की दाल, पीले फल) आदि का दान दें। रत्नों में पुखराज सोने की अंगूठी में धारण कर सकते हैं व बृहस्पति के मंत्र का जप करते रहें।

ऊँ बृं बृहस्पतये नमः

6. शुक्र असुरों का गुरु, भोग-विलास, गृहस्थ एवं सुख का स्वामी है। शुक्र स्त्री जातक है तथा जन समाज का प्रतिनिधित्व करता है। जिन जातकों का शुक्र पीड़ित करता हो, उन्हें गाय को चारा, ज्वार खिलाना चाहिए एवं समाज सेवा करनी चाहिए। रत्नों में हीरा धारण करना चाहिए या बीज मंत्र का जप करें।

ऊँ शुं शुक्राय नमः

7. सूर्य पुत्र शनि, ग्रहों में न्यायाधीश है तथा न्याय सदैव कठोर ही होता है जिससे लोग शनि से भयभीत रहते हैं। शनि चाहे तो राजा को रंक तथा रंक को राजा बना देता है। शनि पीड़ा निवृत्ति हेतु महामृत्युंजय का जप, शिव आराधना करनी चाहिए। शनि के क्रोध से बचने के लिए काले उड़द, काले तिल, तेल एवं काले वस्त्र का दान दें। शनि के रत्न (नीलम) को धारण कर सकते हैं।

ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

8. राहु की राक्षसी प्रवृत्ति है। इसे ड्रेगन्स हैड भी कहते हैं। राहु के दान में कंबल, लोहा, काले फूल, नारियल, कोयला एवं खोटे सिक्के आते हैं। नारियल को बहते जल में बहा देने से राहु शांत हो जाता है। राहु की महादशा या अंतर्दशा में राहु के मंत्र का जप करते रहें। गोमेद रत्न धारण करें।

ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।

9. केतु राक्षसी मनोवृत्ति वाले राहु का निम्न भाग है। राहु शनि के साथ समानता रखता है एवं केतु मंगल के साथ। इसके आराध्य देव गणपति जी हैं। केतु के उपाय के लिए काले कुत्ते को शनिवार के दिन खाना खिलाना चाहिए। किसी मंदिर या धार्मिक स्थान में कंबल दान दें। रत्नों में लहसुनिया धारण करें।

ऊँ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः

दान मुहूर्त

1. सूर्य का दान : ज्ञानी पंडित को रविवार दोपहर के समय।

2. चंद्र का दान : सोमवार के दिन, पूर्णमासी या एकादशी को नवयौवना स्त्री को देना चाहिए।

3. मंगल का दान : क्षत्रिय नवयुवक को दोपहर के समय।

4. बुध का दान : किसी कन्या को बुधवार शाम के समय।

5. गुरु का दान : ब्राह्मण, ज्योतिषी को प्रातः काल।

6. शुक्र का दान : सायंकाल के समय नवयुवती को।

7. शनि का दान : शनिवार को गरीब, अपाहिज को शाम के समय।

8. राहु का दान : कोढ़ी को शाम के समय।

9. केतु का दान : साधु को देना चाहिए।

नवग्रह शांति के अनुभवसिद्ध सरल उपाय :

सूर्य ग्रह को प्रसन्न करने के लिए रविवार को प्रातः सूर्य को अर्घ्य दें तथा जल में लाल चंदन घिसा हुआ, गुड़ एवं सफेद पुष्प भी डाल लें तथा साथ ही सूर्य मंत्र का जप करते हुए 7 बार परिक्रमा भी कर लें।

चंद्र ग्रह के लिए हमेशा बुजुर्ग औरतों का सम्मान करें व उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें। चंद्रमा पानी का कारक है। इसलिए कुएं, तालाब, नदी में या उसके आसपास गंदगी को न फैलाएं। सोमवार के दिन चावल व दूध का दान करते रहें।

मंगल के लिए हनुमान जी को लाल चोला चढ़ाएं, मंगलवार के दिन सिंदूर एवं चमेली का तेल हनुमान जी को अर्पण करें। इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। यह प्रयोग केवल पुरुष ही करें।

बुध ग्रह के लिए तांबे का एक सिक्का लेकर उसमें छेद करके बहते पानी में बहा दें। बुध को अपने अनुकूल करने के लिए बहन, बेटी व बुआ को इज्जत दें व उनका आशीर्वाद लेते रहें। शुभ कार्य (मकान मुर्हूत) (शादी-विवाह) के समय बहन व बेटी को कुछ न कुछ अवश्य दें व उनका आशीर्वाद लें। कभी-कभी (नपुंसक) का आशीर्वाद भी लेना चाहिए।

बृहस्पति ग्रह के लिए बड़ों का दोनों पांव छूकर आशीर्वाद लें। पीपल के वृक्ष के पास कभी गंदगी न फैलाएं व जब भी कभी किसी मंदिर, धर्म स्थान के सामने से गुजरें तो सिर झुकाकर, हाथ जोड़कर जाएं। बृहस्पति के बीज मंत्र का जप करते रहें।

शुक्र ग्रह यदि अच्छा नहीं है तो पत्नी व पति को आपसी सहमति से ही कार्य करना चाहिए। व जब घर बनाएं तो वहां कच्ची जमीन अवश्य रखें तथा पौधे लगाकर रखें। कच्ची जगह शुक्र का प्रतीक है। जिस घर में कच्ची जगह नहीं होती वहां घर में स्त्रियां खुश नहीं रह सकतीं। यदि कच्ची जगह न हो तो घर में गमले अवश्य रखें जिसमें फूलों वाले पौधे हों या हरे पौधे हों। दूध वाले पौधे या कांटेदार पौधे घर में न रखें। इससे घर की महिलाओं को सेहत संबंधी परेशानी हो सकती है।

शनि ग्रह से पीड़ित व्यक्ति को लंगड़े व्यक्ति की सेवा करनी चाहिए। चूंकि शनि देव लंगड़े हैं तो लंगड़े, अपाहिज भिखारी को खाना खिलाने से वे अति प्रसन्न होते हैं।

राहु ग्रह से पीड़ित को कौड़ियां दान करें। रात को सिरहाने कुछ मूलियां रखकर सुबह उनका दान कर दें। कभी-कभी सफाई कर्मचारी को भी चाय के लिए पैसे देते रहें। केतु ग्रह की शांति के लिए गणेश चतुर्थी की पूजा करनी चाहिए। कुत्ता पालना या कुत्ते की सेवा करनी चाहिए (रोटी खिलाना)।

केतु ग्रह के लिए काले-सफेद कंबल का दान करना भी फायदेमंद है। केतु-ग्रह के लिए पत्नी के भाई (साले), बेटी के पुत्र (दोहते) व बेटी के पति (दामाद) की सेवा अवश्य करें। यहां सेवा का मतलब है जब भी ये घर आएं तो इन्हें इज्जत दें।

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🙏जय माता वैष्णोदेवी जी,🙏

Thursday, 17 June 2021

कब होगी विवाह? विवाह योग निर्धारण

 

By

Vastu Guru Mkpoddar


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ज्योतिष और वास्तु समाधान Vastu Guru_ Mk.
WP. 9333112719
विवाह कब होगी? विवाह योग निर्धारणवर्तमान में युवक-युवतियां का उच्च शिक्षा या अच्छा करियर बनाने के चक्कर में अधिक उम्र के हो जाने पर विवाह में काफी विलंब (Delay in Marriage) हो जाता है। उनके माता-पिता भी असुरक्षा की भावनावश अपने बच्चों के अच्छे खाने-कमाने और आत्मनिर्भर होने तक विवाह न करने पर सहमत हो जाने के कारण विवाह में विलंब-देरी हो जाती है।इस समस्या के निवारणार्थ अच्छा होगा की किसी विद्वान ज्योतिषी को अपनी जन्म कुंडली दिखाकर विवाह में बाधक ग्रह या दोष को ज्ञात कर उसका निवारण करें।

ज्योतिषीय दृष्टि से जब विवाह योग बनते हैं, तब विवाह टलने से विवाह में बहुत देरी हो जाती है। वे विवाह को लेकर अत्यंत चिंतित हो जाते हैं। वैसे विवाह में देरी होने का एक कारण बच्चों का मांगलिक होना भी होता है। इनके विवाह के योग 27, 29, 31, 33, 35 व 37वें वर्ष में बनते हैं। जिन युवक-युवतियों के विवाह में विलंब हो जाता है, तो उनके ग्रहों की दशा ज्ञात कर, विवाह के योग कब बनते हैं (Marriage Date Calculator), जान सकते हैं। जिस वर्ष शनि और गुरु दोनों सप्तम भाव या लग्न को देखते हों, तब विवाह के योग बनते हैं। सप्तमेश की महादशा-अंतर्दशा या शुक्र-गुरु की महादशा-अंतर्दशा में विवाह का प्रबल योग बनता है। सप्तम भाव में स्थित ग्रह या सप्तमेश के साथ बैठे ग्रह की महादशा-अंतर्दशा में विवाह संभव है।


विवाह काल का निर्णय (Marriage Date Calculation)

  1. शुक्र चंद्रमा की महादशा मे जब देवगुरू का अंतर आए तो विवाह होता है।
  2. दशम भाव के स्वामी की महादशा में जब अष्टम भाव के स्वामी का अंतर आए तो भी विवाह होता है।
  3. यदि कुंडली में शुक्र ग्रह से अन्य कोई ग्रह युति कर रहा हो तो ऎसे ग्रह की महादशा में गुरू, शुक्र व शनि के अंतर काल में विवाह प्रकरण तय होते हंै।
  4. लग्न भाव के स्वामी व सप्तम भाव के स्वामी के स्पष्ट राशि योग के समान राशि मे उसी अंश पर देवगुरू आते हैं तो विवाह होता है।
  5. यदि महादशा सप्तम भाव के स्वामी चल रही तो उस (सप्तम) भाव मे स्थित ग्रह, बृहस्पति व शनि के अंतर काल मे विवाह निश्चित होता है।
  6. सप्तम भाव के स्वामी व शुक्र के स्वामित्व वाले भाव में जब चंद्र व गुरू की गोचरीय युति हो तो विवाह होता है।

अन्य योग

  1. लग्नेश, जब गोचर में सप्तम भाव की राशि में आए।
  2. जब शुक्र और सप्तमेश एक साथ हो, तो सप्तमेश की दशा-अंतर्दशा में।
  3. लग्न, चंद्र लग्न एवं शुक्र लग्न की कुंडली में सप्तमेश की दशा-अंतर्दशा में।
  4. शुक्र एवं चंद्र में जो भी बली हो, चंद्र राशि की संख्या, अष्टमेश की संख्या जोड़ने पर जो राशि आए, उसमें गोचर गुरु आने पर।
  5. लग्नेश-सप्तमेश की स्पष्ट राशि आदि के योग के तुल्य राशि में जब गोचर गुरु आए।
  6. दशमेश की महादशा और अष्टमेश के अंतर में।
  7. सप्तमेश-शुक्र ग्रह में जब गोचर में चंद्र गुरु आए।
  8. द्वितीयेश जिस राशि में हो, उस ग्रह की दशा-अंतर्दशा में।

विवाह में बाधक योग (Marriage Obstacles)

जन्म कुंडली में 6, 8, 12 स्थानों को अशुभ माना जाता है। मंगल, शनि, राहु-केतु और सूर्य को क्रूर ग्रह माना है। इनके अशुभ स्थिति में होने पर दांपत्य सुख में कमी आती है। सप्तमाधिपति द्वादश भाव में हो और राहू लग्न में हो, तो वैवाहिक सुख में बाधा होना संभव है। सप्तम भावस्थ राहू युक्त द्वादशाधिपति से वैवाहिक सुख में कमी होना संभव है। द्वादशस्थ सप्तमाधिपति और सप्तमस्थ द्वादशाधिपति से यदि राहू की युति हो तो दांपत्य सुख में कमी के साथ ही अलगाव भी उत्पन्न हो सकता है। लग्न में स्थित शनि-राहू भी दांपत्य सुख में कमी करते हैं। सप्तमेश छठे, अष्टम या द्वादश भाव में हो, तो वैवाहिक सुख में कमी होना संभव है। षष्ठेश का संबंध यदि द्वितीय, सप्तम भाव, द्वितीयाधिपति, सप्तमाधिपति अथवा शुक्र से हो, तो दांपत्य जीवन का आनंद बाधित होता है। छठा भाव न्यायालय का भाव भी है। सप्तमेश षष्ठेश के साथ छठे भाव में हो या षष्ठेश, सप्तमेश या शुक्र की युति हो, तो पति-पत्नी में न्यायिक संघर्ष होना भी संभव है।यदि विवाह से पूर्व कुंडली मिलान करके उपरोक्त दोषों का निवारण करने के बाद ही विवाह किया गया हो, तो दांपत्य सुख में कमी नहीं होती है। किसी की कुंडली में कौन सा ग्रह दांपत्य सुख में कमी ला रहा है। इसके लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह लें।

विवाह योग के मुख्‍य कारक (Vivah Yog)

सप्तम भाव का स्वामी खराब है या सही है वह अपने भाव में बैठ कर या किसी अन्य स्थान पर बैठ कर अपने भाव को देख रहा है। सप्तम भाव पर किसी अन्य पाप ग्रह की द्रिष्टि नही है। कोई पाप ग्रह सप्तम में बैठा नही है। यदि सप्तम भाव में सम राशि है। सप्तमेश और शुक्र सम राशि में है। सप्तमेश बली है। सप्तम में कोई ग्रह नही है। किसी पाप ग्रह की द्रिष्टि सप्तम भाव और सप्तमेश पर नही है। दूसरे सातवें बारहवें भाव के स्वामी केन्द्र या त्रिकोण में हैं, और गुरु से द्रिष्ट है। सप्तमेश की स्थिति के आगे के भाव में या सातवें भाव में कोई क्रूर ग्रह नही है।

विवाह नही होगा अगर (No Marriage Yog)

सप्तमेश शुभ स्थान पर नही है। सप्तमेश छ:, आठ या बारहवें स्थान पर अस्त होकर बैठा है। सप्तमेश नीच राशि में है। सप्तमेश बारहवें भाव में है, और लगनेश या राशिपति सप्तम में बैठा है। चन्द्र शुक्र साथ हों, उनसे सप्तम में मंगल और शनि विराजमान हों। शुक्र और मंगल दोनों सप्तम में हों। शुक्र मंगल दोनो पंचम या नवें भाव में हों। शुक्र किसी पाप ग्रह के साथ हो और पंचम या नवें भाव में हो। शुक्र बुध शनि तीनो ही नीच हों। पंचम में चन्द्र हो, सातवें या बारहवें भाव में दो या दो से अधिक पापग्रह हों। सूर्य स्पष्ट और सप्तम स्पष्ट बराबर का हो।

विवाह में देरी (Delay in Marriage)

सप्तम में बुध और शुक्र दोनो के होने पर विवाह वादे चलते रहते है,विवाह आधी उम्र में होता है। चौथा या लगन भाव मंगल (बाल्यावस्था) से युक्त हो,सप्तम में शनि हो तो कन्या की रुचि शादी में नही होती है।सप्तम में शनि और गुरु शादी देर से करवाते हैं।

चन्द्रमा से सप्तम में गुरु शादी देर से करवाता है,यही बात चन्द्रमा की राशि कर्क से भी माना जाता है। सप्तम में त्रिक भाव का स्वामी हो,कोई शुभ ग्रह योगकारक नही हो,तो पुरुष विवाह में देरी होती है। सूर्य मंगल बुध लगन या राशिपति को देखता हो,और गुरु बारहवें भाव में बैठा हो तो आध्यात्मिकता अधिक होने से विवाह में देरी होती है।लगन में सप्तम में और बारहवें भाव में गुरु या शुभ ग्रह योग कारक नही हों,परिवार भाव में चन्द्रमा कमजोर हो तो विवाह नही होता है,अगर हो भी जावे तो संतान नही होती है।महिला की कुन्डली में सप्तमेश या सप्तम शनि से पीडित हो तो विवाह देर से होता है।राहु की दशा में शादी हो, या राहु सप्तम को पीडित कर रहा हो,तो शादी होकर टूट जाती है,यह सब दिमागी भ्रम के कारण होता है।

विवाह का समय (Vivah Yog Calculator)

  • सप्तम या सप्तम से सम्बन्ध रखने वाले ग्रह की महादशा या अन्तर्दशा में विवाह होता है
  • कन्या की कुन्डली में शुक्र से सप्तम और पुरुष की कुन्डली में गुरु से सप्तम की दशा में या अन्तर्दशा में विवाह होता है
  • सप्तमेश की महादशा में पुरुष के प्रति शुक्र या चन्द्र की अन्तर्दशा में और स्त्री के प्रति गुरु या मंगल की अन्तर्दशा में विवाह होता है
  • सप्तमेश जिस राशि में हो,उस राशि के स्वामी के त्रिकोण में गुरु के आने पर विवाह होता है
  • गुरु गोचर से सप्तम में या लगन में या चन्द्र राशि में या चन्द्र राशि के सप्तम में आये तो विवाह होता है
  • गुरु का गोचर जब सप्तमेश और लगनेश की स्पष्ट राशि के जोड में आये तो विवाह होता है
  • सप्तमेश जब गोचर से शुक्र की राशि में आये और गुरु से सम्बन्ध बना ले तो विवाह या शारीरिक सम्बन्ध बनता है
  • सप्तमेश और गुरु का त्रिकोणात्मक सम्पर्क गोचर से शादी करवा देता है, या प्यार प्रेम चालू हो जाता है
  • चन्द्रमा मन का कारक है,और वह जब बलवान होकर सप्तम भाव या सप्तमेश से सम्बन्ध रखता हो तो चौबीसवें साल तक विवाह करवा ही देता है।

भूत प्रेत बाधा निवारण के 10 उपाय

 

भूत-प्रेत की बाधा को दूर करने के उपाय । भूत प्रेत बाधा से मुक्ति दिलाए ये आसान से उपाय

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Bhut Pret Badha Se Mukti Ke 10 Shaktishali Totke .अब हम आपको भूत प्रेत बाधा को दूर करने का दूसरा उपाय बता रहे हैं । इस उपाय से भी आप अपने घर में नकारात्मक शक्तियों को और भूत प्रेत जैसी बाधाओं को दूर कर सकते हो ।

आधा लीटर गंगाजल लेना है , आधा लीटर केवड़े का जल लेना है , गुलाब का जल आधा लीटर , 50 ग्राम सुहागा । इन सबके साथ में हल्दी का पाउडर मिला लेना है ।

पूर्णिमा के दिन इन सब को अपनी छत के ऊपर खुला छोड़ देना है । चंद्रमा की किरणें इस पानी में गिरने चाहिए । ऐसी जगह पर इस पानी को रखना है ।

इस पानी को आपको किसी भी बर्तन में इकट्ठा करके रख लेना है । उसके बाद में रोजाना आपको गंगाजल वाले पानी के साथ में इस पानी के दो ढक्कन को मिला लेना है और पूरे घर में इस पानी को थोड़ा-थोड़ा छिड़कना है ।

यदि आप सुबह शाम इस पानी का छींटा लगाते हैं तो आपके घर पर भूत-प्रेत का साया नहीं रहेगा । भूत प्रेत बाधा से मुक्ति मिलेगी । भूत प्रेत बाधा से मुक्ति दिलाए ये आसान से उपाय
Ghost | भूत भगाने के 10 सरल उपाय

हींग का ये छोटा-सा उपाय दिलाएगा भूत-प्रेत बाधा से छुटकारा।

भूत प्रेत बाधा निवारण टोटके

Bhut Pret Badha Se Mukti Ke 10 Shaktishali Totke . चीन के छोटे से प्रयोग से आप भूत प्रेत को भगा सकते हो और भूत-प्रेत की बाधा को हींग के इस छोटे से टोटके और प्रयोग से दूर कर सकते हो ।

हींग से भूत प्रेत को भगाने के लिए और वह प्रेत की बाधा को दूर करने के लिए आपको एक काला कपड़ा लेना होगा । इस काले कपड़े में आपको दो लहसुन , हींग और अजवाइन को बांध लेना होता है ।

इन सब को काले कपड़े में बांधकर के एक छोटी सी पोटली बना लेनी है और इस पोटली को एक काले धागे से बांध लेना है ।

अब इस पोटली को पुरुषों को अपने सीधे पैर में यानी कि दाएं पैर में बांधना है और महिलाओं को अपने बाएं पैर में बांधना है ।

इस पोटली को छोटा , बच्चा , बड़ा , महिला , बूढ़ा कोई भी बांध सकता है और इस टोटके को कोई भी कर सकता है । आपको इस पोटली को 9 दिन तक अपने पैर में बांधे रखना है ।

9 दिन के बाद में इस पोटली को खोल करके आपको चौराहे के ऊपर फेंक आना है और पीछे मुड़ कर के नहीं देखना है ।

इस टोटके को आपको 9 दिन करना है । साफ-सुथरे हो करके इस टोटके को करना है । हींग और लहसुन की बदबू से भूत प्रेत भाग जाते हैं । इससे जादू टोने और काले जादू का असर भी खत्म होता है ।

भूत प्रेतबाधा से मुक्ति के 10 अचूक उपाय, Bhut Pret Badha Se Mukti Ke 10 Shaktishali Totke

प्रेत बाधा से मुक्ति के उपाय ? – Pret badha se Mukti ke upay kya hai?

दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि आप किस प्रकार प्रेत बाधा से मुक्त हो सकते हैं यानी कि प्रेत बाधा से मुक्ति के उपाय क्या-क्या है?

क्या आप भी अपने जीवन में भूत प्रेत बाधा से मुक्त होना चाहते हैं।

आप भूत प्रेत या फिर भूत पिशाच माने या ना माने लेकिन अधिकतर लोगों के लिए यह ऊपरी बाधा होती है जो कि उनको बहुत ज्यादा नुकसान तथा मुसीबतों में झोंक देती है।

अलग-अलग धारणाओं तथा मान्यताओं के अनुसार मृत आत्माए भूत प्रेत योनि में शामिल एक अदृश्य ताकतवर शक्ति मानी जाती है।

भूत प्रेत का होना मनुष्य की अकाल मृत्यु का कारण माना जाता है हम वैसी आत्माओं के प्रभाव को ही भूत के रूप में अनुभव करते हैं।

आइए दोस्तों अब जानते हैं कि प्रेत बाधा से मुक्ति के उपाय क्या-क्या है यानी आप क्या-क्या काम करके प्रेत बाधाओं से मुक्त हो सकते हो।

प्रेत बाधा से मुक्ति के उपाय निम्नलिखित है?

1 . नजर उतरवाना :- भूत-प्रेत की बाधा को दूर करने के लिए आप शनिवार के दिन नजर उतारने का टोटका भी कर सकते हैं यह बड़ा ही आसान होता है।

2 . अभिमंत्रित लोकेट :- जिस किसी भी व्यक्ति के भूत प्रेत की छाया हो या ऊपरी छाया हो उस व्यक्ति के गले में ओम या रुद्राक्ष का अभिमंत्रित लोकेट पहना दे।

इसी के साथ उसके सिर पर चंदन , केसर या फिर भभूत का तिलक भी लगा दे।

3 . अभिमंत्रित अंजन :- आप किसी भी मायावी शक्ति या भूत प्रेत पिशाच या फिर ऊपरी छाया को दूर करने के लिए एक सरल उपाय अभिमंत्रित अंजन यानी काजल का उपयोग भी कर सकते हैं।

हींग का ये छोटा-सा उपाय दिलाएगा भूत प्रेत बाधा से छुटकारा – hing ka yah Chhota sa upay dilayega , bhoot Pret badha se chhutkara?

दोस्तों घर की नकारात्मक शक्तियों को यानी ऊपरी शक्तियों को दूर करने के लिए आप हींग का टोटका भी कर सकते हैं यह काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

हम आपको बता दें कि हींग का छोटा सा उपाय भी आपको भूत प्रेत बाधा से छुटकारा दिला सकता है।

क्योंकि कई घरों के अंदर नकारात्मक शक्तियां तथा ऊर्जाएं होती है। जिसके कारण वहां पर भूत प्रेत का वास हो जाता है।

ऐसी स्थिति में उस घर में रहने वाले लोगों को कहीं समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसा में हिंग का टोटका आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हम आपको बता देते हैं कि अगर किसी के घर में भूत प्रेतों का वास है और आप इससे बचना चाहते हैं ।

तो मंगलवार या शनिवार को सात साबुत लाल मिर्च के साथ थोड़ा सा हिंग लेकर पूरे घर के कोनों में छुआ दे।

अब इसे किसी चौराहे पर रख कर आ जाए, आते वक्त यह ध्यान रखें कि पीछे मुड़कर नहीं देखना है। यह करने से प्रेत बाधा दूर होगी।

Ghost – भूत भगाने के 10 सरल उपाय।

दोस्तों अब हम आपको भूत यानी प्रेत बाधा दूर करने के 10 सरल उपायों के बारे में बताएंगे जो आपके लिए काफी ज्यादा कारगर सिद्ध होंगे।

हिंदू धर्म में भी हमें भूतों से बचने के लिए कई सारे उपाय बताए गए हैं।

इसके साथ ही अर्थ वेद में भी भूतों और दुष्ट आत्माओं को दूर करने से संबंधित अनेक उपायों का वर्णन किया गया है।

चलिए अब हम आपको प्रेत बाधा दूर करने के 10 सरल उपाय के बारे में बताते हैं।

प्रेत बाधा दूर करने के 10 सरल उपाय

1 . आप ओम या रुद्राक्ष का अभिमंत्रित लोकेट अपने गले में पहन ले।

सिर पर चंदन, केसर या भभूत का तिलक लगा ले और हाथ में मौली अवश्य बांध ले।

2 . दीपावली के दिन आपको शुद्ध सरसों के तेल तथा घी का दीया जला कर उसका काजल बनाना है।

यह काजल लगाने से भूत ,प्रेत ,पिशाच तथा ऊपरी छाया दूर होती है।

3 . रात को भोजन के बाद तथा सोने से पहले चांदी की कटोरी में देवस्थान पर लोंग तथा कपूर को जलाना है।

इससे आकस्मिक, देवीक तथा भौतिक संकटों से मुक्ति मिलती है।

  1. प्रेत बाधा को दूर करने के लिए पुष्य नक्षत्र में धतूरे के पौधे को जड़ सहित उखाड़ लेना है ।

और उसे धरती में ऐसा दबाना है कि जड़ वाला भाग ऊपर रहे तथा पूरा पौधा जमीन के अंदर चला जाए।

इस उपाय से भी घर में प्रेत बाधा दूर होती है।

5 . प्रेत बाधा के निवारण के लिए आप हनुमान मंत्र का उच्चारण भी कर सकते हैं। जोकि निम्नलिखित है ।

इस हनुमान मंत्र का 5 बार जाप करने से भूत कभी भी निकट नहीं आते हैं।

हनुमंत मंत्र कुछ इस प्रकार है –

“ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ऊँ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत पिशाच-शाकिनी-डाकिनी-यक्षणी-पूतना-मारी-महामारी, यक्ष राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकम्‌ क्षणेन हन हन भंजय भंजय मारय मारय शिक्षय शिक्षय महामारेश्वर रुद्रावतार हुं फट् स्वाहा”

6 . प्रेत बाधा को दूर करने के लिए अशोक वृक्ष के सात पत्ते मंदिर में रखकर पूजा करें।

पत्तों के सूखने पर नई पत्तों का इस्तेमाल करें तथा सूखे पत्तों को पिपल के पेड़ के नीचे रख दे।

7 . प्रेत बाधा को दूर करने के लिए गणेश भगवान को एक पूरी सुपारी रोज चढ़ाएं तथा चावल का दान करें।

  1. भूत को भगाने के लिए आप मां काली के लिए रोज उनके नाम की दो अगरबत्ती सुबह और दो अगरबत्ती शाम ढलने से पहले लगाएं ।

और उनसे घर तथा शरीर की रक्षा के लिए प्रार्थना करें।

9 . प्रेत बाधाओं को दूर करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान मंदिर में हनुमान जी का श्रृंगार करें व चोला चढ़ाएं।

  1. भूत प्रेत को भगाने के लिए मंगलवार या शनिवार के दिन बजरंग बाण का पाठ शुरू करें। क्योंकि यह डर तथा भय को भगाने का सबसे अच्छा उपाय है।

भूत को कैसे भगाया जाता है? – bhoot ko kaise bhagaye jata hai?

अब हम आपको बताएंगे कि भूत को कैसे भगाया जाता है यानी कि ऐसे टिप्स हम आपको बताएंगे जो भूत को भगाने के लिए कारगर साबित होंगे।

कई घर ऐसे होते हैं जिनमें नकारात्मक शक्तियां यानी भूत प्रेत का साया रहता है।

यहां पर मौजूद नकारात्मक शक्तियां के कारण वहां रहने वालों की तरक्की नहीं होती है।

ऐसे स्थान पर रहने वाले लोग अक्सर अस्वस्थ रहते हैं और धन की हानि समेत कई सारी परेशानियां उनको घेरे रहती है।

अब आपके मन में भी यह सवाल होगा कि इससे छुटकारा कैसे पाएं यानी घर में भूत प्रेत या फिर अपनी छाया से छुटकारा कैसे पाया जाता है जो चलिए हम आपको बता देते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि घर के अंदर नमक का ढेला रखने से भी नकारात्मक शक्तियां वहां से चली जाती है।

तथा इसके साथ ही घर की तरक्की में आ रही सारी बाधाएं दूर हो जाती है।

अगर घर से प्रेत बाधाएं भगानी है तो आप देवदारू, हींग , सरसों, नीम की पत्ती, कटेली , चना मोर पंख और देसी घी मिलाकर मिट्टी के पात्र में जलाने से
घर की नकारात्मक शक्तियां चली जाती है और रुकी हुई तरक्की की समस्या दूर हो जाती है।

ऊपरी बाधा हटाने के उपाय। – upari badha hatane ke upay kya hai?

दोस्तों ऊपरी बाधा हटाने के उपाय जानने से पहले हम आपको यह बता देते हैं कि ऊपरी बाधा क्या होती है।

जब किसी व्यक्ति पर भूत प्रेत या फिर नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव होता है तो उसे ही हम ऊपरी बाधा कहते हैं।

जब किसी व्यक्ति पर ऊपरी बाधा का असर होता है तो उसका व्यवहार बदल ही जाता है। वह कभी जोर से गुस्सा करने लगता है तो कभी रोने लगता है।

ऊपरी बाधा को हटाने के लिए आप शनिवार के दिन धतूरे के पौधे को जड़ समेत उखाड़ कर लाना है ।

और इसे अपने घर के आसपास की जगह पर उल्टा करके गाड़ दें यानि कि इसकी जड़े ऊपर रहनी चाहिए और पौधा जमीन के अंदर।

ऊपरी बाधा हटाने के लिए शनिवार के दिन काले धतूरे की जड़ को लेकर आना है और पीड़ित कि भुजा पर बांध देना है।

ऐसा कहा जाता है कि भूत वहां नहीं आते हैं जहां पर गाय का वास होता है।

इसलिए अगर आपके घर में कहीं भी गाय का आवास से तो वहां पर गाय के गोबर का कंडा जला दें और उस पर गाय का थोड़ा सा घी डाल दें।

जब किसी व्यक्ति को ऊपरी बाधा सताती है तो उसे हींग मिले पानी से कुल्ला करवाना चाहिए।

ऐसा करने से तांत्रिक तथा ऊपरी बाधा का प्रभाव नष्ट हो जाता है।

ये उपाय सिद्ध ज्योतिष या पंडित के द्वारा ही करें।

हानि भी हो सकती है। इसके जिम्मेदार आप खुद होंगे।

अधीक जानकारी प्राप्त करने हेतु wp 9333112719 पर संपर्क करें। या site पर संपर्क करें । https://asthajyotish10.wixsite.com/asthajyotish-1

Friday, 11 June 2021

दूसरा विवाह और अन्य स्त्री योग

 दूसरा विवाह और अन्य स्त्री योग



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प्रिय पाठक गण आज मै आपको द्वि विवाह व उसमे सहायक कुछ योगो की जानकरी इस लेख के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास करुंगा।

प्रायः अधिकांशतः सभी को ज्ञात होता है कि हमारी जन्म कुंडली का सप्तम भाव भार्या व विवाह स्थान कहलाता है । लेकिन यह तथ्य बहुत कम व्यक्तियो को ज्ञात होता है कि जीवन साथी से अलगाव के पश्चात आगामी विवाह योग अथवा भार्या या स्त्री का विचार कहां से करें और किस भाव से करें । इस विषय मे भी आपको विद्वानो का मतांतर देखने को मिल सकता है ।

हमे ज्ञात है कि सप्तम स्थान भार्या अर्थात पत्नी स्थान होता है लेकिन अगर हमारी पहली पत्नी से हमारा अलगाव होता है या अपनी पहली पत्नी के अतिरिक्त दूसरी स्त्री का विचार करें या संबध बनाये तो वह हमारी पत्नी की सौतन कहलायेगी अर्थात सप्तम भाव से छटा भाव यानी कि हमारी कुंडली का 12वां भाव दूसरी स्त्री को सूचित करता है। इसी तरह

तीसरी स्त्री का स्थान 12वे से छटा यानी कि 5वां स्थान होता है। क्रमशः इसी तरह आप अन्य स्त्रीयो का विचार कर सकते है।

दूसरे विवाह व स्त्रीयो से संबधित कुछ योग निम्नलिखित है ।

यदि सप्तमेश और द्वितीयेश शु्क्र के साथ या पाप ग्रह के साथ होकर 6,8,12 भाव मे हो तो दूसरी शादी का योग बनता है।

यदि लग्न,सप्तम, चंद्र द्विस्वभाव राशियो मे पड रहे हो तो दूसरे विवाह के योग मे सहायक होते है।

यदि लग्नेश ,सप्तमेश , जन्मेश्वर व शुक्र द्विस्वभाव राशियो मे हो तो भी दूसरे विवाह के योग बनते है।

यदि सातवे घर का मालिक शुभ ग्रहो से युक्त होकर 6,8,12 मे पडा हो और सातवां भाव पाप युक्त हो तो दूसरी शादी का योग बनता है ।

लग्नेश उच्च ,वक्री ,मूलत्रिकोण,स्वग्रही या अच्छे वर्ग का हो तो बहुत सी स्त्रीयो की प्राप्ती कराता है।

यदि सातवां भाव पापयुक्त हो व सातवे का मालिक नीच राशि मे हो तो दो विवाह का योग बनता है।

चंद्रमा या शुक्र सातवे हो तो जीवन मे अनेक स्त्रीयो का योग बनता है।

यदि नोवें घर का मालिक सातवे घर मे हो और सातवे घर का मालिक चौथे घर मे हो तथा सातवे और ग्यारहवें घर का मालिक केन्द्र मे हो तो अनेक स्त्री़यो का योग बनता है।

दसवे घर के मालिक और उसका नवांशपति दोनो शनि के साथ हो और साथ मे छटे घर का मालिक भी हो या छटे घर के मालिक देख रहा हो तो अनेक स्त्रीयो का योग बनता है।

यदि 1,2,7 भावो मे कोई पापी ग्रह हो और सातवे का मालिक नीच या अस्त हो तो अनेक स्त्रीयो का योग बनाता है।

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नौकरी या व्यवसाय में लाभ होगा कुंडली से जानें

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