Tuesday, 26 January 2021

समस्त घर के वास्तु दोष उपाय करें

 

Astha Jyotish ✋

Vastu Guru Mkpoddar

ज्योतिष और वास्तु समाधान 

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घर में या घर के बाहर कई तरह के वास्तु दोष हो सकते हैं। वास्तु दोष से कई तरह के रोग या शोक उत्पन्न होते हैं। अत: यदि आपका घर कार्नर का है, तीराहे, चौराहे पर है, दक्षिण दिशा का घर है या घर के अंदर किसी भी प्रकार से वास्तु दोष है तो आप उक्त 10 उपाय आजमाएं और निश्‍चिंत हो जाएं।

 

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1. दक्षिण में है घर का द्वार : यदि आपका घर दक्षिणमुखी है तो आप सबसे पहले घर के सामने द्वारा से दोगुनी दूर पर नीम का एक पेड़ लगाएं। दूसरा यह कि द्वारा के ऊपर पंचमुखी हनुमान का चित्र लगाएं। आदमकद दर्पण भी लगा सकते हैं। मुख्य द्वार के ऊपर पंचधातु का पिरामिड लगवाने से भी वास्तुदोष समाप्त होता है। गणेशजी की पत्थर की दो मूर्ति बनवाएं जिनकी पीठ आपस में जुड़ी हो। इस जुड़ी गणेश प्रतिमा को मुख्य द्वार के बीचों-बीच चौखट पर फिक्स कर दें, ताकि एक गणेशजी अंदर को देखें और एक बाहर को।

 

2.एक ही सीध में हैं द्वार : यदि आपके मुख्‍य द्वारा के बाद भीतर के द्वार भी एक ही सीध में हैं तो यह भी वास्तुदोष निर्मित करता है। इसके लिए घर में बीच वाले द्वार के मध्य मोटा परदा लगाएं या विंड चाइम लगाएं। यदि आपके मुख्य द्वार के बाद का हाल या कमरा बड़ा है आप ऐसा भी कर सकते कि दूसरे दरवाजे के ठीक सामने कुछ दूरी पर प्लायवुड का एक द्वार बराबर का पाट लगाएं और उसपर कोई अच्छी सी पेंटिंग लगा दें।

 

3.रसोई घर नहीं बना है आग्नेय कोण पर तो : यदि आपका रसोई घर आग्नेय कोण में नहीं बना है तो आप रसोईघर में किचन स्टैंड के उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में ऊपर सिंदूरी गणेशजी की तस्वीर लगाएं या यज्ञ करते हुए ऋषियं की फोटो लगाएं।

 

4.वास्तु दोष मिटाने के लिए कर्पूर रखें : यदि घर के किसी स्थान पर वास्तु दोष निर्मित हो रहा है तो वहां एक कर्पूर की 2 टिकियां रख दें। जब वह टिकियां गलकर समाप्त हो जाए तब दूसरी दो टिकिया रख दें। इस तरह बदलते रहेंगे तो वास्तुदोष निर्मित नहीं होगा।

 

6.बाथरूम और टॉयलेट एक साथ है तो : बाथरूम और टॉयलेट एक साथ है तो यह भी भयंकर वास्तु दोष उत्पन्न करता है। इसके लिए सबसे पहले आप इसे हमेश स्वच्छ रखें। नीले रंग के मग और बाल्टी ही रखें। एक कटोरे में खड़ा नमक भरकर बाथरूम-टॉयलेट के किसी कौने में रखें। यदि गलती से आपका शौचालय ईशान कोण में बन गया है तो फिर यह बहुत ही धनहानि और अशांति का कारण बन जाता है। प्राथमिक उपचार के तौर पर उसके बाहर शिकार करते हुए शेर का चित्र लगा दें।

 

7.शयन कक्ष : वैसे तो दक्षिण-पश्चिमी दिशा में होना चाहिए या उत्तर दिशा भी ठीक है लेकिन यदि शयन कक्ष अग्निकोण में हो तो पूर्व-मध्य दीवार पर शांत समुद्र का चित्र लगाना चाहिए। सिर हमेशा पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर ही रखना चाहिए।

 

8.उत्तर-पूर्व अर्थत ईशान दिशा : यदि ईशान दिशा में किसी भी प्रकार का दोष है तो आप इस दिशा को खाली करके इस दिशा में एक पीतल के बर्तन में जल भरकर रख दें या तुलसी का पौधा लगाकर उसमें नित्य जल देते रहें। पीतल के बर्तन का पानी नित्य बदलते रहें।

 

9.सुंदर कांड या रामचरित का पाठ : घर के वास्तु दोष को दूर करने के लिए समय समय पर रामचरित का पाठ या सुंदरकांड का पाठ करवाते रहें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकाल जाएगी।

 

10.सुंदर बनाएं घर को : घर में किसी भी प्रकार से वास्तु दोष है तो घर को स्वास्तिक चिन्ह, मांडने और पौधों से सजाएं। पीले, गुलाबी और हल्के नीले रंग का उपयोग करें। दक्षिण की दिशा में भारी सामान रखें जैसे लोहे की अरमारी, पलंग, फ्रीज आदि। घर की वस्तुओं के स्थान को बदलकर भी वास्तु दोष ठीक किया जा सकता है।

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Sunday, 10 January 2021

भूत प्रेत बाधा निवारण के टोटगे

भूत प्रेत बाधा निवारण टोटके

अशरीरी आत्माओं को विभिन्न वर्ग में रखा जाता है, जैसे – भूत प्रेत, डाकिनी, शाकिनी, चुड़ैल, राक्षस, पिशाच आदि| ये सभी  आत्माओं की अलग-अलग अवस्थाएं हैं जिनसे प्रभावित होने पर अलग-अलग लक्षण प्रगट होते हैं| कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं –


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  • भूत बाधा से ग्रस्त मनुष्य की आंखे लाल हो जाती हैं, शरीर काँपता है तथा उसका आचरण विक्षिप्तों के समान होता है| उसके जिस्म में अचानक इतनी ताकत आ जाती है कि वह किसी को भी उठाकर फेंक दें| विषय का ज्ञान न होने पर भी पंडितों की तरह बात कर सकता है|
  • पिशाच से प्रभावित इंसान के शरीर से दुर्गंध आती है, वह अत्यधिक कठोर वचन बोलता है, उसे एकांत प्रिय होता है, किसी के भी सम्मुख नग्न हो सकता है| ऐसे लोगों को अत्यधिक भूख लगती है|
  • यक्ष से त्रस्त व्यक्ति अचानक लाल रंग पसंद करने लगता है| बहुत कम या बहुत धीमे स्वर में बात करता है| प्रायः अपनी बात आंखो के इशारे से करता है|
  • प्रेत बाधा ग्रस्त मनुष्य अक्सर ज़ोर-ज़ोर से साँसे लेता है, खूब चीखता है, इधर उधर भागता है| भोजन में रुचि कम हो जाती है| कठोर वचन बोलता है|
  • यदि किसी पर चुड़ैल का साया पड़ जाए तो ऐसा व्यक्ति अचानक खूब हृष्ट-पुष्ट हो जाता है| बात-बात पर मुस्कुराता है| मांस भक्षण में रुचि बढ़ जाती है|
  • शाकिनी का प्रभाव महिलाओं पर होता है| वह बेसुध हो जाती हैं, रोती हैं तथा उनके बदन में कंपन होता है|

उपर्युक्त कुछ लक्षण हिस्टीरिया नामक रोग से मिलते जुलते हैं, अतएव सर्वप्रथम चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है| यदि दवाएं बेअसर साबित हो रही हों तथा लक्षण दिन प्रति दिन उग्र होते जा रहे हों तो निश्चित ही यह ऊपरी बाधा के संकेत हैं|

भूत प्रेत बाधा हरण टोटके/मंत्र

  • शनिवार अथवा मंगलवार को श्वेत अपराजिता तथा जावित्री के पत्तों का रस नस्य के रूप में लें| इस से डाकिनी-शाकिनी का दुष्प्रभाव दूर होता है|
  • पूस माह में कृष्ण पक्ष की त्रियोदशी को विशाखा नक्षत्र में सर्वप्रथम पीपल की जड़ को अपने यहाँ आने के लिए आमंत्रित करें| अगले दिन रात में पीपल की जड़ लेकर आएँ, निर्वसन स्नान करें, पुनः धूप दीप दिखाकर उसकी पूजा करें| फिर उस जड़ को पीड़ित व्यक्ति की भुजा में ताबीज की भांति बांध दें| ऐसा करने से प्रेत बाधा दूर होती है|
  • घोड़े के खुर की नख अश्विनी नक्षत्र में लेकर आएँ, पुनः उसे आग में जलाकर धुनी दें| इस से भूत-प्रेत की बाधा दूर होती है|
  • शनिवार के दिन काले धतूरे की जड़ पीड़ित व्यक्ति के दाहिनी बांह पर बांध दें| यदि वह स्त्री है तो धतूरे की जड़ उसकी बाईं बांह पर बांधे|
  • चाँदी की छोटी सी गुड़ियाँ बनवाएँ, रात के समय एक किग्रा चावल, पाव भर चीनी, लाल कपड़ा तथा एक नारियल सभी वस्तुएँ(गुड़िया सहित) पीड़ित के ऊपर से उसारकर श्मशान में रख दें|
  • सवा गज लाल कपड़ा, चाँदी का एक रुपया, एक किग्रा चावल तथा एक किग्रा तिल किसी बर्तन में रखकर पीड़ित के ऊपर से उसारकर बर्तन को किसी नदी के किनारे रख दें|
  • उड़द की दाल से बने दहीबड़े विषम संख्या में लेकर पीड़ित के ऊपर से उसार दें तथा काले कुत्ते को खिला दें| ध्यान रखें वह काला कुत्ता पालतू न हो|

भूत प्रेत बाधा हरण मंत्र

  • ऊँ ऐं हीं श्रीं हीं हूं हैं ऊँ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत पिशाच-शाकिनी-डाकिनी यक्षणी-पूतना-मारी-महामारी, यक्ष राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकम क्षणेन हन हन भंजय भंजय मारय मारय शिक्षय शिक्ष्य महामारेश्रवर रूद्रावतार हुं फट स्वाहा।

यह मंत्र कठिन है तथा लंबा भी है परंतु इसका असर अचूक होता है| 108 बार इस मंत्र को जपते हुए जल को अभिमंत्रित करें तथा पीड़ित को कुछ जल पिलाने के बाद इस जल से छींटे मारें| समस्त ऊपरी बाधा से मुक्ति मिल जाती है|

  • तेल नीर, तेल पसार चौरासी सहस्र डाकिनीर छेल, एते लरेभार मुइ तेल पडियादेय अमुकार (नाम) अंगे अमुकार (नाम) भार आडदन शूले यक्ष्या-यक्षिणी, दैत्या-दैत्यानी, भूता-भूतिनी, दानव-दानिवी, नीशा चौरा शुचि-मुखा गारुड तलनम वार भाषइ, लाडि भोजाइ आमि पिशाचि अमुकार (नाम) अंगेया, काल जटार माथा खा ह्रीं फट स्वाहा। सिद्धि गुरुर चरण राडिर कालिकार आज्ञा।

सर्वप्रथम किसी शुभ मुहूर्त में उपर्युक्त मंत्र को 10 हजार बार जपकर सिद्ध कर लें| एक कटोरी में सरसो तेल लेकर 21 बार इस मंत्र का जाप करें तथा फूँक मारें| यह अभिमंत्रित तेल पीड़ित के ऊपर छिड़कें|

  • अपने सामने भूत-प्रेत बाधाग्रस्त व्यक्ति को बैठाएँ, हाथ में मोरपंख रखें| अब निम्नलिखित मंत्र को बुदबुदाएँ तथा मोरपंख से पीड़ित को झाड़ें –

बांधों भूत जहाँ तू उपजो छाड़ो गिर पर्वत चढ़ाई सर्ग दुहेली तू जमी

झिलमिलाही हुंकारों हनुमंत पचारई सभी जारि जारि भस्म करें जो चापें सींउ।

ज्योतिष तथा शाबर ग्रंथों में इन बाधाओं से मुक्ति के अनेकानेक उपाय उपाय बताए गए हैं।

इस प्रकार की बाधा निवारण करने से पूर्व स्वयं की रक्षा भी आवश्यक हें.इसलिए इन मन्त्रों द्वारा अपनी तथा अपने आसन की सुरक्षा कर व्यवस्थित हो जाएँ…

जब भी हम पूजन आदि धार्मिक कार्य करते हैं वहां आसुरी शक्तियां अवश्य अपना प्रभाव दिखाने का प्रयास करती हैं। उन आसुरी शक्तियों को दूर भगाने के लिए हम मंत्रों का प्रयोग कर सकते हैं। इसे रक्षा विधान कहते हैं। नीचे रक्षा विधान के बारे में संक्षिप्त में लिखा गया है। रक्षा विधान का प्रयोग करने से बुरी शक्तियां धार्मिक कार्य में बाधा नहीं पहुंचाती तथा दूर से ही निकल जाती हैं।

रक्षा विधान- रक्षा विधान का अर्थ है जहाँ हम पूजा कर रहे है वहाँ यदि कोई आसुरी शक्तियाँ, मानसिक विकार आदि हो तो चले जाएं, जिससे पूजा में कोई बाधा उपस्थित न हो। बाएं हाथ में पीली सरसों अथवा चावल लेकर दाहिने हाथ से ढंक दें तथा निम्न मंत्र उच्चारण के पश्चात सभी दिशाओं में उछाल दें।

मंत्र—–

ओम अपसर्पन्तु ते भूता: ये भूता:भूमि संस्थिता:।

ये भूता: बिघ्नकर्तारस्तेन नश्यन्नु शिवाज्ञया॥

अपक्रामन्तु भूतानि पिशाचा: सर्वतो दिशम।

सर्वेषामविरोधेन पूजा कर्मसमारभ्भे॥

देह रक्षा मंत्र:—-

ऊँ नमः वज्र का कोठा, जिसमें पिंड हमारा बैठा। ईश्वर कुंजी ब्रह्मा का ताला, मेरे आठों धाम का यती हनुमन्त रखवाला।

इस मंत्र को किसी भी ग्रहण काल में पूरे समय तक लगातार जप करके सिद्ध कर लें।

किसी दुष्ट व्यक्ति से अहित का डर हो, ग्यारह बार मंत्र पढ़कर शरीर पर फूंक मारे तो आपका शरीर दुश्मन के आक्रमण से हर प्रकार सुरक्षित रहेगा। उल्टी खोपड़ी मरघटिया मसान बांध दें, बाबा भैरो की आन।

इस मंत्र को श्मशान में भैरोजी की पूजा, बलि का भोग देकर सवा लाख मंत्र जपे तथा आवश्यकता के समय चाकू से अपने चारों तरफ घेरा खींचे तो अचूक चैकी बनती है।

इससे किसी भी प्रकार की मायावी शक्ति साधना में विघ्न नहीं डाल सकती। होली, दीपावली या ग्रहण काल में इस मंत्र को सिद्ध कर लें 11 माला जपकर।

ऊँ नमः श्मशानवासिने भूतादिनां पलायन कुरू-कुरू स्वाहा।

इस मंत्र से 108 बार अभिमंत्रित करके लहसुन, हींग को पीसकर इसके अर्क को बाधाग्रस्त रोगी के नाक व आंख में लगायें, भूत तुरंत शरीर छोड़कर चला जाएगा।

बहेड़े के पत्ते या जड़ को घर लाकर धूप, दीप, नैवेद्य और पंचोपचार पूजा के बाद 1 माला यानि 108 बार इस मंत्र से 21 दिन अभिमंत्रित करने से सिद्ध हो जाएगा।

ऊँ नमः सर्वभूताधिपतये ग्रसग्रस शोषय भैरवी चाजायति स्वाहा।’

इस पत्ते को जहां स्थापित किया जाता है, वहां किसी भी प्रकार से भूत प्रेतबाधा व जादू टोने का प्रभाव नहीं पड़ता तथा सिद्ध जड़ को बच्चे या बड़े के गले में ताबीज बनाकर पहनाया जा सकता है।

प्रेतबाधा निवारण भूत, प्रेत, डाकिनी, शाकिनी तथा पिशाच, मशान आदि तामसी शक्तियों से रक्षा के लिए यह साधना सर्वोत्तम तथा सरल उपाय वाली है।

इसके लिए साधक को चाहिए कि किसी शुभ घड़ी में रविपुष्य योग अथवा शनिवार को) उल्लू लेकर, उसके दाएं डैने के कुछ पंख निकाल लें तथा उल्लू को उड़ा दें। इसके बाद उस पंख को गंगाजल से धोकर स्नानादि करके पूर्वाभिमुख होकर लाल कंबल के आसन पर बैठकर 2100 बार मंत्र पढकर प्रत्येक पंख पर फूंक मारे।

इस प्रकार से अभिमंत्रित करके, जलाकर उन पंखों की राख बना लें ।

मंत्र: ऊँ नमः रूद्राय, नमः कालिकायै, नमः चंचलायै नमः कामाक्ष्यै नमः पक्षिराजाय, नमः लक्ष्मीवाहनाय, भूत-प्रेतादीनां निवारणं कुरू-कुरू ठं ठं ठं स्वाहा।

इस मंत्र से सिद्ध भभूति को कांच के चैड़े पात्र में सुरक्षित रख लें। जब भी किसी स्त्री या पुरुष को ऊपरी बाधा हो, इसे निकालकर चुटकी भर विभूति से 108 बार मंत्र पढ़कर झाड़ देने से जो अला बला हो, वह भाग जाती है।

अधिक शक्तिशाली आत्मा हो तो इसे ताबीज में रखकर पुरुष की दाहिनी भुजा पर, स्त्री की बाई भुजा पर बांधने से दुबारा किसी आत्मा या दुरात्मा का प्रकोप नहीं होता। भूतबाधा से रक्षा हेतु यंत्र इस यंत्र को मंगलवार, या शनिवार की रात 12 बजे पीपल के पेड़ के नीचे लिखे।

यह यंत्र श्मशान की राख में अष्टगंध मिलाकर अनार की कलम से लिखें। स्वच्छ अखंडित भोजपत्र को लिखने से पहले गंगाजल से धोकर सुखा लें, और यंत्र बनाएं।

स्वप्न में भूत दिखाई दे तो यह यंत्र बनाएं। इस यंत्र को केवड़े के रस या आक के दूध से भोजपत्र पर बनाकर फिर जिस स्त्री पुरुष को स्वप्न में भूत दिखते हैं उसके सिरहाने रख दें।

यहां कुछ प्रमुख शाबर मंत्रों का विवरण प्रस्तुत है। ये मंत्र सहज और सरल हैं, जिनके जप अनुष्ठान से उक्त बाधाओं तथा जादू-टोनों के प्रभाव से बचाव हो सकता है।

निम्नलिखित मंत्र को सिद्ध करने के लिए उसका २१ दिनों तक एक माला जप नियमित रूप से करें। हनुमान मंदिर में अगरबत्ती जलाएं। २१ वें दिन मंदिर में एक नारियल और लाल वस्त्र की ध्वजा चढ़ाएं। यह मंत्र भूत, प्रेत, डाकिनी, शाकिनी नजर दोष, जादू-टोने आदि से बचाव एवं शरीर की रक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी है।

मंत्र : ॐ हनुमान पहलवान, बरस-बारह का जवान, हाथ में लड्डू, मुंह में पान। खेल-खेल कर लंका के चौगान। अंजनी का पूत, राम का दूत। छिण में कीलौं, नौ खंड का भूत। जाग-जाग हनुमान हुङ्काला, ताती लोहा लङ्काला। शीश जटा डग डेंरू उमर गाजे, वृज की कोटडी वृज का ताला। आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चम्पे न सीव। अजरा, झरे, भरमा भरे। ईंघट पिंड की रक्षा, राजा रामचंद्र जी, लक्ष्मण, कुंवर हनुमान करें।


किसी बुरी आत्मा के प्रभाव अथवा किसी ग्रह के अशुभ प्रभाव के फलस्वरूप संतान सुख में बाधा से मुक्ति हेतु श्री बटुक का उतारा करना चाहिए।

यह क्रिया निम्नलिखित विधि से रविवार, सोमवार, मंगलवार तीन दिन लगातार करें।

विधि : उतारे के स्थान पर एक पात्र में सरसों के तेल में बने उड़द के ११ बड़े, उड़द की दाल भरी ११ कचौड़ियां, ७ प्रकार की मिठाइयां, लाल फूल, सिंदूर, ४ बत्तियों का दीपक, 1 नींबू और 1 कुल्हर जल रखें। सिंदूर को चार बत्तियों वाले दीपक के तेल में डालें। फिर फूल, कचौड़ी, बड़े, मिठाइयां सभी सामग्री एक पत्तल पर रखें तथा मन ही मन यह कहें कि ”यह भोग हम श्री बटुक भैरव जी को दे रहे हैं, वे अपने भूत- प्रेतादिकों को खिला दें और संकट ग्रस्त व्यक्ति के ऊपर जो बुरी आत्मा या ग्रहों की कुदृष्टि है, उसका शमन कर दें।” समस्त सामग्री को पीड़ित व्यक्ति के सिर के ऊपर ७ बार उतारा करके किसी चौराहे पर रखवा दें। सामग्री रखवाकर लौट आएं। ध्यान रहे, लौटते समय पीछे न देखें। उतारा परिवार के सदस्य करें। यह क्रिया यदि अपने लिए करनी हो, तो स्वयं करें।


कृत्या निवारण के लिए एक नींबू को चार टुकड़ों में चीरें। चारों टुकड़ों पर ४-४ बार निम्नलिखित मंत्र पढ़कर उन्हें चारों कोनों में फेंक दें।


मंत्र : आई की, माई की, आकाश की, परेवा पाताल की। परेवा तेरे पग कुनकुन। सेवा समसेर जादू गीर समसेर की भेजी। ताके पद को बढ़ कर, कुरु-कुरु स्वाहा।


राई, लाल चंदन, राल, जटामंसी, कपूर, खांड, गुग्गुल और सफेद चंदन का चूरा क्रमानुसार दो गुना लें और सबको मिलाकर अच्छी तरह कूट लें। फिर उस मिश्रण में इतना गोघृत मिलाएं कि पूरी सामग्री अच्छी तरह मिश्रित हो जाए। इस सामग्री से प्रेत बाधा से ग्रस्त घर में धूनी दें, प्रेत बाधा, क्लेशादि दूर होंगे और परिवार में शांति और सुख का वातावरण उत्पन्न होगा। व्यापार स्थल पर यह सामग्री धूनी के रूप में प्रयोग करें, व्यापार में उन्नति होगी।


कोई मकान भूत-प्रेत, पिशाच, तांत्रिक, ओझा, डाकिनी या शाकिनी के अभिचार कर्म ग्रस्त हो, तो उसमें भोजपत्र पर अष्टगंध की स्याही और अनार की कलम से निम्नलिखित शाबरी यंत्र लिखकर लगा दें। यंत्र लेखन के समय निम्न मंत्र का मन ही मन उच्चारण करते रहें एवं मंत्र के ऊपर यह मंत्र भी लिख दें—–


मंत्र :ॐ ह्रांक ह्रींक क्लींक व्यक ह्योंक हेः।

भूत छुड़ाने का मंत्र : भूत छुड़ाने के भी अनेकानेक शाबर मंत्र हैं, जिनमें एक इस प्रकार है।

तेल नीर, तेल पसार चौरासी सहस्र डाकिनीर छेल, एते लरेभार मुइ तेल पडियादेय अमुकार (नाम) अंगे अमुकार (नाम) भार आडदन शूले यक्ष्या-यक्षिणी, दैत्या-दैत्यानी, भूता-भूतिनी, दानव-दानिवी, नीशा चौरा शुचि-मुखा गारुड तलनम वार भाषइ, लाडि भोजाइ आमि पिशाचि अमुकार (नाम) अंगेया, काल जटार माथा खा ह्रीं फट स्वाहा। सिद्धि गुरुर चरण राडिर कालिकार आज्ञा।

विधि : ऊपर वर्णित मंत्र को पहले किसी सिद्ध मुहूर्त में १०,००० बार जप कर सिद्ध कर लें। फिर सरसों तेल को २१ बार अभिमंत्रित कर भूत बाधाग्रस्त व्यक्ति पर छिड़कें, तो भूत उतर जाता है।

जादू-टोना निवारण—–

निम्नलिखित मंत्र को किसी सिद्ध मुहूर्त में १००८ बार सिद्ध करके प्रयोग के समय उसका जप करते हुए मोर पंख से पीड़ित व्यक्ति को सात बार झाड़ें।

मंत्र : ॐ नमो आदेश गुरु को। लूना चमारीज गत की बिजुरी, मोती हेल चमके। अमुक के पिंड में डमान करे विडमान करे, तो उस लण्डी के ऊपर पारो। दुहाई तुरंत सुलेमान पैगंबर की फिरे, मेरी भकित, गुरु की शकित। फुरो मंत्र ईश्वरी वाचा।

कोई मकान भूत-प्रेत, पिशाच, तांत्रिक, ओझा, डाकिनी या शाकिनी के अभिचार कर्म ग्रस्त हो, तो उसमें भोजपत्र पर अष्टगंध की स्याही और अनार की कलम से निम्नलिखित शाबरी यंत्र लिखकर लगा दें। यंत्र लेखन के समय निम्न मंत्र का मन ही मन उच्चारण करते रहें एवं यंत्र के ऊपर यह मंत्र भी लिख दें।

नजर दोष, टोना व प्रेत बाधा निवारक प्रयोग—-

शुभ नक्षत्र में अनार की कलम और केसर व लाल चंदन से यह यंत्र लिखें।

यंत्र लिखते समय मंत्र क्रम से पढ़ें जैसे पहली लाइन के पहले खाने में ६ लिखें तो पढ़ें ‘सत्ती पत्ती शारदा’। फिर दूसरे खाने में १२ लिखें तो पढ़ें ‘बारह बरस कुवारी’। इसी प्रकार ९ लिखने पर ‘ऐ को माई परमेश्वरी’, १४ लिखने पर ‘चौदह भुवन निवास’, २ पर ‘दोई पक्खी निर्मली’, १३ पर ‘तेरह देवी देश’, ८ पर ‘अष्टभुजा परमेश्वरी’, ११ पर ‘ग्यारह रुद्र सैनी’, १६ पर ‘सोलह कला संपूर्ण’, ३ पर ‘त्रा नयन भरपूर’, १० पर ‘दसे द्वार निर्मली’, ५ ‘पंच करे कल्याण’, ९ पर ‘नव दुर्गा’, ६ पर ‘षट् दर्शनी’, १५ पर ‘पंद्रह तिथि जान’ और ४ लिखने पर ‘चाऊ कूठ प्रधान’। इस तरह यंत्र निर्माण करके पीड़ित के गले में बांध दें, नजर दोष, टोने, प्रेत बाधा आदि से मुक्ति मिलेगी।

भूत प्रेत बाधा नाशक मन्त्र—–

भूत-प्रेत बाधा निवारक हनुमत मन्त्र इस प्रकार हैं :-


ऊँ ऐं हीं श्रीं हीं हूं हैं ऊँ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत पिशाच-शाकिनी-डाकिन- ी यक्षणी-पूतना-मारी-हामारी, यक्ष राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकम क्षणेन हन हन भंजय भंजय मारय मारय शिक्षय शिक्ष्य महामारेश्रवर रूद्रावतार हुं फट स्वाहा।

उक्त मंत्र को श्रद्वा, विश्वास के साथ जप कर मन्त्र से अभिमनित्रत जल पीडि़त जातक या जातिका को पिलाने या छींटे मारने से इस प्रकार की बाधा से मुकित मिलती है।

कौन बनता है भूत, कैसे रहें भूतों से सुरक्षित..

जिसका कोई वर्तमान न हो, केवल अतीत ही हो वही भूत कहलाता है। अतीत में अटका आत्मा भूत बन जाता है। जीवन न अतीत है और न भविष्य वह सदा वर्तमान है। जो वर्तमान में रहता है वह मुक्ति की ओर कदम बढ़ाता है।

आत्मा के तीन स्वरुप माने गए हैं- जीवात्मा, प्रेतात्मा और सूक्ष्मात्मा। जो भौतिक शरीर में वास करती है उसे जीवात्मा कहते हैं। जब इस जीवात्मा का वासना और कामनामय शरीर में निवास होता है तब उसे प्रेतात्मा कहते हैं। यह आत्मा जब सूक्ष्मतम शरीर में प्रवेश करता है, उस उसे सूक्ष्मात्मा कहते हैं।

भूत-प्रेतों की गति एवं शक्ति अपार होती है। इनकी विभिन्न जातियां होती हैं और उन्हें भूत, प्रेत, राक्षस, पिशाच, यम, शाकिनी, डाकिनी, चुड़ैल, गंधर्व आदि कहा जाता है।

भूतों के प्रकार : हिन्दू धर्म में गति और कर्म अनुसार मरने वाले लोगों का विभाजन किया है- भूत, प्रेत, पिशाच, कूष्मांडा, ब्रह्मराक्षस, वेताल और क्षेत्रपाल। उक्त सभी के उप भाग भी होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार 18 प्रकार के प्रेत होते हैं। भूत सबसे शुरुआती पद है या कहें कि जब कोई आम व्यक्ति मरता है तो सर्वप्रथम भूत ही बनता है।

इसी तरह जब कोई स्त्री मरती है तो उसे अलग नामों से जाना जाता है। माना गया है कि प्रसुता, स्त्री या नवयुवती मरती है तो चुड़ैल बन जाती है और जब कोई कुंवारी कन्या मरती है तो उसे देवी कहते हैं। जो स्त्री बुरे कर्मों वाली है उसे डायन या डाकिनी करते हैं। इन सभी की उत्पति अपने पापों, व्याभिचार से, अकाल मृत्यु से या श्राद्ध न होने से होती है।

84 लाख योनियां : पशुयोनि, पक्षीयोनि, मनुष्य योनि में जीवन यापन करने वाली आत्माएं मरने के बाद अदृश्य भूत-प्रेत योनि में चले जाते हैं। आत्मा के प्रत्येक जन्म द्वारा प्राप्त जीव रूप को योनि कहते हैं। ऐसी 84 लाख योनियां है, जिसमें कीट-पतंगे, पशु-पक्षी, वृक्ष और मानव आदि सभी शामिल हैं।

प्रेतयोनि में जाने वाले लोग अदृश्य और बलवान हो जाते हैं। लेकिन सभी मरने वाले इसी योनि में नहीं जाते और सभी मरने वाले अदृश्य तो होते हैं लेकिन बलवान नहीं होते। यह आत्मा के कर्म और गति पर निर्भर करता है। बहुत से भूत या प्रेत योनि में न जाकर पुन: गर्भधारण कर मानव बन जाते हैं।

पितृ पक्ष में हिन्दू अपने पितरों का तर्पण करते हैं। इससे सिद्ध होता है कि पितरों का अस्तित्व आत्मा अथवा भूत-प्रेत के रूप में होता है। गरुड़ पुराण में भूत-प्रेतों के विषय में विस्तृत वर्णन मिलता है। श्रीमद्*भागवत पुराण में भी धुंधकारी के प्रेत बन जाने का वर्णन आता है।

अतृप्त आत्माएं बनती है भूत : जो व्यक्ति भूखा, प्यासा, संभोगसुख से विरक्त, राग, क्रोध, द्वेष, लोभ, वासना आदि इच्छाएं और भावनाएं लेकर मरा है अवश्य ही वह भूत बनकर भटकता है। और जो व्यक्ति दुर्घटना, हत्या, आत्महत्या आदि से मरा है वह भी भू*त बनकर भटकता है। ऐसे व्यक्तियों की आत्मा को तृप्त करने के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। जो लोग अपने स्वजनों और पितरों का श्राद्ध और तर्पण नहीं करते वे उन अतृप्त आत्माओं द्वारा परेशान होते हैं।

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ज्योतिष और वास्तु समाधान  Vastu Guru_ Mk.

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Friday, 8 January 2021

हस्तरेखा से जानिए जीवन के उतार चढ़ाव

हस्तरेखा विश्लेषण निम्नप्रकार----


Vastu Guru Mkpoddar 🙏 

हथेली का रंग गुलाबी से जातक धन आकर्षित करनेवाला होता है।

अंगूठा लम्बा हैं -बहुत शुभ। ईच्छाशक्ति ज्यादा हैं।अंगूठा मांसल से अपने हितों की रक्षा करनेवाला होता हैं।

जातक मित्रवत स्वभाव का है।

अंगुलियां. पतली और लम्बी हैं।शुभ माना है।ऐसे दीर्घ आयु के हो।

हथेली आयताकार से ज्यादातर दीमागी कार्य करते हैं।

जीवन के प्रारम्भिक 19/20 वर्ष आयु तक पारिवारिक या शारीरिक परेशानी मे रहे हो।

24/25 वर्ष उम्र मे प्रोग्रेस लाईन जीवन रेखा पर नजर आ रही हैं।अतः तब से भाग्य मे सुधार मानें।पर वास्तविक भाग्योदय 36 वर्ष से जाने। 55वर्ष उम्र के बाद स्थिति बहुत अच्छी।पैसों की कोई  कमी नहीं, वृद्धावस्था अच्छी।

जातक के कई ग्रहों के पर्वत राजयोग कारक स्थिति में है।

सूर्य पर्वत पर एक खडी रेखा का उदगम हो रहा है।पूर्ण होने पर बहुत शुभ।55वर्ष उम्र के बाद नेम फेम प्राप्त हो।जातक कोशिश करें सरकारी क्षेत्र से भी लाभ हो।

तर्जनी अंगुली अनामिका अंगुली से छोटी है, लीडरशिप क्वालिटी कम है।उतरदायित्व लेने की हिम्मत नहीं है।

सूर्य अंगुली(अनामिका) तर्जनी से बडी है अतः ऐसे कलात्मक विचारों वाले, क्रियेटिव नेचर ,ठीक से अनालिसिस करनेवाले, खतरा उठाने वाले, घरवालों को सरप्राइज देनेवाले होते है।

कनिष्ठिका अंगुली अनामिका के प्रथम पौरुआ तक जारही है।अतः ऐसा हिसाब किताब करने में होशियार होते हैं।डोकुमेंटेंशन अच्छा । बोलने की अच्छी प्रतिभा, किसी को अपनी बातों से सन्तुष्ट करदेना।बुध पर्वत विकसित है, व्यवसाय की सूझबूझ।

जीवन रेखा के अन्त मे द्विशाखा, मछली जैसा चिन्ह बन रहा है ,अभी पूर्ण नहीं है।केतु स्थान मे बनी मछली अचानक धन दिलाती है।पैतृक संपत्ति प्राप्त हो।विदेश यात्रा हो।

ऐसे जन्म स्थान से दूर रहकर ज्यादा उन्नति करते हैं।

बुध रेखा बन रही हैं, अभी बुध क्षेत्र तक नहीं पहुचीं। बुध पर्वत विकसित है, अतः व्यवसाय की प्रतिभा हैं।ऐसे व्यवसाय करे तो ज्यादा अच्छा हो।

मनी त्रिभुज बन रहा है, अतः धन का संचय हो।तथा बुद्धिमान और विद्वान भी बनाता है।

यह विश्लेषण अल्पज्ञानानुसार रेखाओं तथा ग्रहों के पर्वतों के आधार पर है जो चेन्ज भी होता है।अतः सम्भावित समझे।

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जातक की हस्तरेखा का विश्लेषण निम्नप्रकार हैं:--

जातक एक इन्डिपेन्डेन्ट सोच वाला, शाई नेचर, ज्यादातर मेन्टल वर्क करनेवाला, मित्रवत स्वभाव के व्यक्ति हैं।हथेली के रंग से पता चलता हैं, रक्त संचार स्लगिश है।हिसाब किताब करने, डोकुमेन्टेशन रखने मे कमजोर। कोमुनिकेशन स्किल कमजोर, अपनी बातों से किसी को सन्तुष्ट नहीं कर पाना। दीर्घायु व्यक्ति है।

मंगल रेखा:---मंगल रेखा करीब जीवन के प्रारम्मिक 35 वर्षों तक जीवन रेखा के साथ साथ चल रही हैं।उस दौरान आदमी जमीन जायदाद बना लेता हैं।आगे यह रेखा मन्द(शिथिल) होती चली गयीं और 37-38वर्ष उम्र तक नजर नहीं आरही हैं।फिर कुछ समय ठहराव के बाद दृष्टिगोचर हो रही हैं।अतः स्थिति ठीक होने लगे।यह मंगल रेखा लाईफ सपोर्ट का काम भी करती हैं।

भाग्य रेखा:--जीवन के प्रारम्भ से अच्छी स्थिति रही करीब 32 वर्षो तक।उसके बाद नदारद और फिर करीब 35 वर्ष आयु से फिर चालु हैं।सायद काम बदला हो।मन्द गति से अग्रसर है और वृद्धावस्था 60वर्षो तक रही।रेखाएं समय के साथ स्थिति बदलती हैं ।अच्छा होगा।

गुरु पर्वत:---यहाँ क ई स्त्रोतों से आय की रेखाएं हैं। वर्ग भी बनरहे हैं।मकान वगैरह हो।

मस्तिष्क रेखा:----करीब 14-15 वर्ष आयु से जीवन रेखा से अलग होकर आगे बढ रही हैं। रेखा के सेलो होने से 61वर्ष आयु तक मामूली मानसिक तनाव रह सकता हैं। आगे द्विशाखा हो रही हैं।सीधी जारही हैं।अतः दीमाग अच्छा।

मंगल पर्वत:--निम्न मंगल पर्वत दबा हैं।शारीरिक शक्ति. कमजोर हो।बौद्धिक शक्ति अच्छी है।.कही चिडचिडापन भी हो।

सूर्य पर्वत:---विकसित नहीं हैं।एक खडी रेखा को तिरछी रेखा काट रही हैं।अतः नेम फेम प्राप्त करने मे परेशानी। सूर्य भगवान को अर्घ्य दे।

शुक्र वलय:---

इनकी हथेली मे शुक्र का वलय बन रहा है।जो कम लोगों. के हाथों मे मिलता हैं।

इसे अशुभ माना गया है।,ये काफी ज्यादा भावुक होते है।जातक शुक्र पर्वत से सम्बन्धित कार्य करता है जैसे फिल्मों मे अभिनय, संगीत, गायन का कार्य, सौन्दर्य प्रशाधन का कार्य करें।

ऐसे मुडी स्वभाव के होते हैं।विचार बदलते रहना।पल मे अच्छा पल मे खराब बन जाना।

शुक्र वलय से धनाढ्य होते है।कामुख भी होते है।

ज्यादातर धनाढ्य घर मे जन्म होना, और घर सभी सुख सुविधाएं होना।

ऐसे को कभी हृदय पर चोट लगी हो, दिल मे विचार आते हैं, उससे उबरना मुश्किल रहता है।

व्यापार मे सफलता भी देता हैं।

यह विश्लेषण अल्पज्ञानानुसार रेखाओं तथा ग्रहों के पर्वतों के आधार पर है।जो. चेन्ज भी होते है।अतः सम्भावित समझे।

बांया हाथ हथेली की फोटो भी मांगी थी।

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