Friday, 18 December 2020

तोड़ फोड़ किए बिना घर के वास्तु दोष दूर करें

 


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घर में या घर के बाहर कई तरह के वास्तु दोष हो सकते हैं। वहीं इन वास्तु दोषों से कई तरह के रोग या शोक उत्पन्न होते हैं। अत: यदि आपका घर कार्नर का है, तीराहे, चौराहे पर है, दक्षिण दिशा का घर है या घर के अंदर किसी भी प्रकार से वास्तु दोष है तो आप भी कुछ खास उपाय आजमाकर इनसे मुक्ति पा सकते हैं।


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ये हैं खास उपाय...

वास्तु दोषो को दूर करने के कई उपाय हैं। यानि एक ही तरह के वास्तु दोष को दूर करने के अलग अलग उपाय। इसके अलावा सभी तरह के वास्तु दोषों को ठीक करने के उपाय काफी आसान भी हैं।


1. दरवाजे आमने सामने ही हो तो : यदि आपके मुख्य दरवाजे के बाद का हाल या कमरा बड़ा है तो आप दूसरे दरवाजे के ठीक सामने कुछ दूरी पर प्लायवुड का एक द्वार बराबर का पाट लगाएं और उसपर कोई अच्छी सी पेंटिंग लगा दें। वहीं यदि आपके मुख्‍य दरवाजे के बाद भीतर के दरवाजे भी एक ही सीध में हैं तो यह भी वास्तुदोष निर्मित करता है। इसके लिए घर में बीच वाले दरवाजे के मध्य मोटा परदा लगाएं या विंड चाइम लगाएं।


2.कर्पूर - वास्तु दोष मिटाए : यदि घर के किसी स्थान पर वास्तु दोष निर्मित हो रहा है तो वहां एक कर्पूर की 2 टिकियां रख दें। जब वह टिकियां गलकर समाप्त हो जाए तब दूसरी दो टिकिया रख दें। इस तरह बदलते रहेंगे तो वास्तुदोष निर्मित नहीं होगा।


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3.रसोई घर - आग्नेय कोण पर नहीं : यदि आपका रसोई घर आग्नेय कोण में नहीं बना है तो आप रसोईघर में किचन स्टैंड के उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में ऊपर सिंदूरी गणेशजी की तस्वीर लगाएं या यज्ञ करते हुए ऋषियों की फोटो लगाएं।


4. दक्षिण मुखी घर : यदि आपका घर दक्षिणमुखी है, तो आप सबसे पहले घर के सामने दरवाजे से करीब दोगुनी दूर पर नीम का एक पेड़ लगाएं। दूसरा यह कि अपने द्वार के ऊपर पंचमुखी हनुमान का चित्र लगाएं, इसके अलावा आदमकद दर्पण भी लगा सकते हैं। वहीं मुख्य द्वार के ऊपर पंचधातु का पिरामिड लगवाने से भी वास्तुदोष समाप्त होता है।


5. हर दोष को दूर करें श्री गणेश: श्री गणेश कलयुग के देव कहलाते हैं, ऐसे में गणेशजी की पत्थर की दो मूर्ति बनवाएं, जिनकी पीठ आपस में जुड़ी हो। इस जुड़ी गणेश प्रतिमा को मुख्य द्वार के बीचों-बीच चौखट पर फिक्स कर दें, ताकि एक गणेशजी अंदर को देखें और एक बाहर को। माना जाता है कि श्रीगणेश के सम्मुख शुभ और पीछे दरिद्रता होती है, लेकिन दोनों ही तरफ श्री गणेश ही होने से सभी ओर शुभ ही होता है।


6. उत्तर-पूर्व में कैसा भी दोष हो : यदि उत्तर-पूर्व यानि ईशान दिशा में किसी भी प्रकार का दोष है तो आप इस दिशा को खाली करके इस दिशा में एक पीतल के बर्तन में जल भरकर रख दें या तुलसी का पौधा लगाकर उसमें नित्य जल देते रहें। पीतल के बर्तन का पानी नित्य बदलते रहें।


7. सुंदर कांड या रामचरित का पाठ : घर के वास्तु दोष को दूर करने के लिए समय समय पर रामचरित का पाठ या सुंदरकांड का पाठ करवाते रहें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकाल जाएगी।


8. किसी भी प्रकार का वास्तु दोष : घर में किसी भी प्रकार से वास्तु दोष है तो घर को स्वास्तिक चिन्ह सहित पौधों से सजाएं। घर में पीले, गुलाबी और हल्के नीले रंग का उपयोग करें। दक्षिण की दिशा में भारी सामान रखें जैसे लोहे की अरमारी, पलंग, फ्रीज आदि। वहीं कई वास्तु दोष के मामलों में घर की वस्तुओं के स्थान को बदलकर भी इसे ठीक किया जा सकता है।


9. एक साथ - बाथरूम और टॉयलेट : यदि घर में बाथरूम और टॉयलेट एक साथ हों तो यह भी भयंकर वास्तु दोष उत्पन्न करता है। इसके लिए सबसे पहले आप इसे हमेशा स्वच्छ रखें। नीले रंग के मग और बाल्टी ही रखें।


एक कटोरे में खड़ा नमक भरकर बाथरूम-टॉयलेट के किसी कौने में रखें। यदि गलती से आपका शौचालय ईशान कोण में बन गया है तो फिर यह बहुत ही धनहानि और अशांति का कारण बन जाता है। प्राथमिक उपचार के तौर पर उसके बाहर शिकार करते हुए शेर का चित्र लगा दें।


10. शयन कक्ष : सिर हमेशा पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर ही रखना चाहिए। वैसे तो दक्षिण-पश्चिमी दिशा में होना चाहिए या उत्तर दिशा भी ठीक है लेकिन यदि शयन कक्ष अग्निकोण में हो तो पूर्व-मध्य दीवार पर शांत समुद्र का चित्र लगाना चाहिए।


जब घर पहले से बना हो और बाद में वास्तु दोष का पता लगे। ऐसे में घर को तोड़ कर दोबारा से बदलाव करके बनवाना संभव नहीं होता। लेकिन वास्तु दोष दूर करना भी बहुत जरूरी होता है। इन वास्तु दोषों को आप बिना किसी तोड़-फोड़ के इन उपायों से दूर कर सकते हैं।


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1. गलत दिशा में रखा हो बेड- अगर आपका डबलबेड गलत दिशा में रखा हुआ है और आप उसकी दिशा नहीं बदल सकते हैं तो अपने बेड के सामने एक शीशा लगा दें, इससे वास्तु दोष दूर हो जाता है।


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2. सही दिशा में ना हो किचन- वास्तु के अनुसार घर के आग्नेय कोण में किचन बनाना सही होता है लेकिन अगर आपका किचन किसी और दिशा में हो तो आप इस वास्तु दोष को दूर करने के लिए इस दिशा में गैस रख लें या फिर इस दिशा में एक पीले रंग का बल्ब लगा दें और इस बल्ब को हमेशा जलने दें।


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3. घर की पूर्व दिशा का भाग हो सबसे ऊंचा- अगर आपके घर के पूर्व दिशा का भाग घर के दूसरे भागों के मुकाबले सबसे ऊंचा हो तो इस पूर्व दिशा में लोहे का एक पाइप लगा दें या फिर घर के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में ठोस सामान और उत्तरी-पूर्वी भाग में हल्का सामान रख दें।


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4. मुख्य द्वार की दिशा हो गलत- अगर आपके घर का मुख्य दरवाज़ा गलत दिशा में हो तो उस दरवाज़े को गहरे लाल रंग से पेंट कर दें या फिर वहां लाल पर्दे लगा दें। ऐसा करने से वास्तु दोष दूर हो जाएगा।



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5. किचन के सामने हो बाथरूम का दरवाज़ा- वास्तु के अनुसार घर के बाथरूम का दरवाज़ा कभी भी घर के किचन की तरफ नहीं होना चाहिए। अगर आपके घर में ये वास्तु दोष हो तो बाथरूम और किचन के बीच एक पर्दा लगा दें जिससे कि वह एक दीवार का काम करे और दोनों एक-दूसरे के सामने दिखाई ना दें।

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Thursday, 3 December 2020

कौन सी दिशा में मिलेगी सफलता

जानिये कौन सी दिशा में मिलेगी आपको सफलता …..

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 सम्पूर्ण वास्तु शास्त्र दिशाओं पर अधारित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक राशि एवं ग्रह किसी न किसी दिशा का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन ग्रहों व राशियों का प्रभाव ही व्यक्ति को सफल व असफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ज्योतिष शास्त्र और कार्य दिशा-

1- जिन जातकों के दशम स्थान पर शनि बलवान होकर स्थित हो उन्हे पश्चिम दिशा में प्रयास करना चाहिये ये दिशा निसंदेह दोगुणी क्षमता से आपको सफल कर सकती है। इसके अतिरिक्त वृषभ, कन्या व मकर राशि जातक भी पश्चिम दिशा में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

2- यदि दशम स्थान पर सूर्य या गुरु स्थित हो तो ऐसे जातकों को पूर्व दिशा में अत्यधिक सफलता प्राप्त होती है। मीन, कर्क और वृश्चिक राशि जातकों को पूर्व दिशा में जाकर कार्य करने से अधिक सफलता प्राप्त होती है। यदि इन लग्नों का कर्मेश लग्न को प्रभावित करे तो सफलता अवश्य मिलती है।

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3- जिन जातकों की जन्म कुंडली के दशम स्थान पर मंगल स्थित हो उन्हे दक्षिण दिशा में सफलता प्राप्त होती है। सिंह, धनु या मेष लग्न होने पर भी व्यक्ति को दक्षिण दिशा में सफलता प्राप्त होती है।

4- जन्म कुंडली के दशम स्थान पर शुक्र या चंद्र स्थित हो अथवा तुला, कुम्भ, मिथुन लग्न हो तो जातक उत्तर दिशा में सफलता प्राप्त करता है।

5- यदि जन्म कुंडली में लग्नेश द्वादश अथवा अष्टम स्थान में स्थित हो तो जातक को अपने घर बार से दूर जाना पडता है। जन्म स्थान से विपरीत दिशा में जाने से सफलता प्राप्त होती है।

6- लग्न में राहु स्थित हो तथा कर्मेश यदि अष्टम या बारहवें स्थान पर स्थित हो तो जातक को विदेश में सफलता प्राप्त होती है।

7- आंकडों से सम्बंधित काम, लेन-देन का काम, बीमा, धन से सम्बंधित सभी कामों को उत्तर दिशा में करना चाहिये।

8- इलेक्ट्रानिक, जमीन-भूमि, तकनीकी काम, कमप्यूटर से जुडे काम आदि जन्म स्थान से दक्षिण दिशा में करना चाहिये।

9- यात्रा, गमन, साफ-सफाई, गूढ विद्धा से जुडे कार्य, भूमि से प्राप्त वस्तुयें खनिज रत्न, पेट्रोल, डीजल, जुआं व सट्टे से जुडे कार्य, निर्माण कार्य, श्रम एवं समाज कल्याण से जुडे कार्य आदि अपने जन्म स्थान से पश्चिम दिशा में जाकर करने चाहिये।

10- पूर्व दिशा में सभी धार्मिक कार्य, शिक्षा से जुडे कार्य, जल व द्रव्य से सम्बंधित कार्य, सरकारी क्षेत्रों से सम्बन्धित, दवाई व औषधी से सम्बंधित, धर्म व सेवा कार्य आदि पूर्व दिशा में करने चाहिये।

11- जन्म कुंडली का कर्मेश जिस भाव में उच्च या बली होकर स्थित हो उस दिशा में सफलता प्राप्त होती हैं। लग्न को पूर्व दिशा, दशम स्थान को दक्षिण दिशा, सप्तम स्थान को पश्चिम दिशा तथा चतुर्थ भाव को उत्तर दिशा के रूप में जाना जाता है।
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नौकरी या व्यवसाय में लाभ होगा कुंडली से जानें

 नौकरी या व्यवसाय? में लाभ होगा अंत तक पढ़ें www.asthajyotish.in यदि जातक की कुंडली के दशम भाव में चर राशि (1, 4, 7, 10) स्थित है तो ऐसा जात...