ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्मराशि के
नक्षत्रचरणानुसार दिए गए नामाक्षर से ही नामकरण होना चाहिए। बहुत से लोगों का यह मानना है कि हमें अपनी जन्मराश्यानुसार अपना नाम नहीं रखना चाहिए अन्यथा जादू टोना करने वाले लोगों को हमारे ग्रह नक्षत्रों की गति का अनुमान होने से हमें नुकसान हो सकता है। परंतु यथार्थ में यदि हमें अपनी जन्मपत्री के वास्तविक शुभ फल को प्राप्त करना है तो हमें अपने नाम के आदि अक्षर का चयन जन्म राशि नक्षत्र चरणानुसार ही करना चाहिए।
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यदि हमें नक्षत्रचरणानुसार अक्षर पसंद नहीं आ रहे हैं तो राशि अक्षर ले लेना चाहिए। यदि यह भी पसंद न हो तो हमें मित्र राशि के अक्षरानुसार नाम रखना चाहिए। ज्योतिष में नाम के केवल प्रथम अक्षर को ही महत्व दिया गया है। शायद इसीलिए एकता कपूर के धारावाहिक अधिकतर ‘क’ अक्षर से आरंभ होने वाले नाम के ही होते हैं।
अंक शास्त्र में नामांक का विशेष महत्व है। अंक शास्त्र का वैज्ञानिक आधार जन्म दिनांक के पीछे काम करने वाला वाइब्रेशन होता है। अंक शास्त्र में मूलांक व भाग्यांक का हमारे व्यक्तित्व पर असर पड़ता है। यदि नाम का भी इन अंकों के साथ रेजोनेन्स होता है तो हमें शुभ फल प्राप्त होते हैं अन्यथा नाम प्रभावहीन हो जाता है।
नाम का चयन करते हुए नामांक तक पहुंचने की प्रक्रिया में इस बात का ध्यान रखना परमावश्यक होता है कि आपका नामांक आपका मूलांक या भाग्यांक अथवा उनका मित्रांक हो अन्यथा उसकी वाईब्रेशन आपको अधिक बेहतर परिणाम नहीं दे सकेगी। पाठकों की सुविधा हेतु कीरो द्वारा दी गई अंकों के मित्रांक व उनके अक्षरों की तालिका इस प्रकार है -
नाम बदलने या नाम में सूक्ष्म परिवर्तन करने का कारण साधारण नहीं है अपितु इसके लिए लोशु ग्रिड का अध्ययन किया जाता है जिसकी यह अवधारणा सर्वमान्य है कि आपकी जन्मतारीख में से जो अंक विलुप्त है उसका अधिकाधिक प्रयोग आपके नाम की वर्तनी में किया जाए। यदि विलुप्त अंक आपका भाग्यांक हो तो इस विलुप्त अंक को आपका नामांक भी बनाया जा सकता है।
अतः नामकरण के लिए सर्वप्रथम पहला अक्षर राशि अनुरूप चुनें जो मूलांक का भी मित्र हो। पुनः नामांक व पूर्ण नामांक को अपने मूलांक व भाग्यांक के अनुरूप चुनंे। ये नामांक ऐसे चुनें जिससे लोशु ग्रिड के खाली स्थान भर सकें और हमारे व्यक्तित्व की कमी के पूरक बन सकें।
ध्यान रखें कि नक्षत्र व चरण आदि के ज्ञान के लिए जन्म तारीख व समय की जानकारी होना आवश्यक है। यदि समय का ज्ञान न हो तो भी राशि का ज्ञान जन्मतारीख से हो सकता है। यदि जन्म तारीख भी न मालूम हो तो ज्योतिष व अंक शास्त्र दोनों ही नामकरण के लिए व्यर्थ हैं। दोनों शास्त्रों में हमारा ध्येय नाम को जन्म दिवस के अनुरूप बनाना ही है।
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उदाहरण -
इंदिरा गांधी की जन्म तिथि: 19 नवंबर 1917, समय: 23: 11, स्थान: इलाहाबाद है। इसके अनुसार उनकी राशि मकर, नक्षत्र - उत्तराषाढ़ा, चरण तृतीय था। अवकहड़ा चक्र अनुसार उनका नामाक्षर ‘जा’ जैसे जावित्री होता है। लेकिन उनका प्रसिद्ध नाम इंदिरा गांधी था। ‘इ’ अक्षर कृतिका नक्षत्र द्वितीय चरण, वृष राशि को दर्शाता है। वृष राशि मकर राशि की मित्र राशि है। अतः ‘इ’ अक्षर का प्रभाव भी सकारात्मक ही है।
इंदिराजी की जन्म तारीख से इनका मूलांक 1 व भाग्यांक 3 बनता है। उनका नामाक्षर प् एवं नामाक्षरांक 1 होता है जो उनका मूलांक भी है। अर्थात नामाक्षरांक की मूलांक से पूर्ण वाईब्रेशन है। इंदिराजी का नामाक्षर निम्न है:
I N d I R A G A N d H I
1 5 4 1 2 1 3 1 5 4 5 1
14 (नामांक - 5) + 19 = 33 = (3 + 3)
= 6 ( पूर्ण नामांक)
अतः नामांक 5 हुआ एवं पूर्ण नामांक 6 हुआ। नामांक 5 भी मूलांक 1 से मित्रवत संबंध रखता है एवं पूर्ण नामांक 6 भाग्यांक 3 का मित्रांक है। अतः उनका नाम उनके लिए उत्तम है। इस तिथि के मुताबिक इनका लोशु ग्रिड इस प्रकार का बनता है -
इंदिराजी की जन्म तारीख में अंक 1 की पुनरावृत्ति बार-बार हुई है जिसके कारण ये कुशल प्रशासक सिद्ध हुईं। अंक 9 ने इन्हें निर्भीक बनाया। इनके लोशु ग्रिड से कुछ महत्वपूर्ण अंक जैसे 5, 3 व 6 विलुप्त हैं। परंतु यदि इनके नाम का अध्ययन अंक शास्त्र की परिधि में किया जाये तो हम देखते हैं कि इनके प्रसिद्ध नाम का अंक 5 आता है।
पूरे नाम के अंकों का जोड़ 33 है जिसके फलस्वरूप नाम के युग्मांक में दोहरे गुरु का प्रभाव है। पूर्ण नामांक 6 आ रहा है। इसलिए अंक 6 की कमी की भी पूर्णतया पूर्ति हो रही है। इसीलिए इंदिरा जी सर्वश्रेष्ठ वक्ता तथा शिक्षा व ज्ञान के स्तर पर अत्यंत विदुषी व प्रभावशाली प्रशासक थीं।
इन्होंने कठिन से कठिन परिस्थिति में अपने मानसिक संतुलन को नहीं खोया। इनके नाम के युग्मांक में दोहरे गुरु व जन्मतिथि से प्राप्त होने वाले गुरु के अंक 3 से ही इनके अंदर अतिरिक्त मानसिक ऊर्जा थी। इनके नामांक में अंक 5, 3 व 6 का सुंदर समन्वय है। इसीलिए इनका भाषा पर पूर्ण अधिकार था तथा इन्होंने हमेशा बिना पढ़े प्रभावशाली भाषण दिये।
इस प्रकार से हम देखते हैं कि अंक कुंडली में यदि कोई अंक विलुप्त हो तो नाम की वर्तनी में सूक्ष्म परिवर्तन द्वारा हम विलुप्त अंकों की वाइब्रेशन को प्राप्त करके जातक के भाग्य में परिवर्तन कर सकते हैं। नाम बदलने से या नाम की वर्तनी में परिवर्तन करने से भाग्य में बदले हुए नामांक के प्रभाव से हमाॅरा भाग्य परिवर्तित हो सकता है।

