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Wednesday, 23 December 2020
Friday, 18 December 2020
तोड़ फोड़ किए बिना घर के वास्तु दोष दूर करें
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घर में या घर के बाहर कई तरह के वास्तु दोष हो सकते हैं। वहीं इन वास्तु दोषों से कई तरह के रोग या शोक उत्पन्न होते हैं। अत: यदि आपका घर कार्नर का है, तीराहे, चौराहे पर है, दक्षिण दिशा का घर है या घर के अंदर किसी भी प्रकार से वास्तु दोष है तो आप भी कुछ खास उपाय आजमाकर इनसे मुक्ति पा सकते हैं।
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ये हैं खास उपाय...
वास्तु दोषो को दूर करने के कई उपाय हैं। यानि एक ही तरह के वास्तु दोष को दूर करने के अलग अलग उपाय। इसके अलावा सभी तरह के वास्तु दोषों को ठीक करने के उपाय काफी आसान भी हैं।
1. दरवाजे आमने सामने ही हो तो : यदि आपके मुख्य दरवाजे के बाद का हाल या कमरा बड़ा है तो आप दूसरे दरवाजे के ठीक सामने कुछ दूरी पर प्लायवुड का एक द्वार बराबर का पाट लगाएं और उसपर कोई अच्छी सी पेंटिंग लगा दें। वहीं यदि आपके मुख्य दरवाजे के बाद भीतर के दरवाजे भी एक ही सीध में हैं तो यह भी वास्तुदोष निर्मित करता है। इसके लिए घर में बीच वाले दरवाजे के मध्य मोटा परदा लगाएं या विंड चाइम लगाएं।
2.कर्पूर - वास्तु दोष मिटाए : यदि घर के किसी स्थान पर वास्तु दोष निर्मित हो रहा है तो वहां एक कर्पूर की 2 टिकियां रख दें। जब वह टिकियां गलकर समाप्त हो जाए तब दूसरी दो टिकिया रख दें। इस तरह बदलते रहेंगे तो वास्तुदोष निर्मित नहीं होगा।
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3.रसोई घर - आग्नेय कोण पर नहीं : यदि आपका रसोई घर आग्नेय कोण में नहीं बना है तो आप रसोईघर में किचन स्टैंड के उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में ऊपर सिंदूरी गणेशजी की तस्वीर लगाएं या यज्ञ करते हुए ऋषियों की फोटो लगाएं।
4. दक्षिण मुखी घर : यदि आपका घर दक्षिणमुखी है, तो आप सबसे पहले घर के सामने दरवाजे से करीब दोगुनी दूर पर नीम का एक पेड़ लगाएं। दूसरा यह कि अपने द्वार के ऊपर पंचमुखी हनुमान का चित्र लगाएं, इसके अलावा आदमकद दर्पण भी लगा सकते हैं। वहीं मुख्य द्वार के ऊपर पंचधातु का पिरामिड लगवाने से भी वास्तुदोष समाप्त होता है।
5. हर दोष को दूर करें श्री गणेश: श्री गणेश कलयुग के देव कहलाते हैं, ऐसे में गणेशजी की पत्थर की दो मूर्ति बनवाएं, जिनकी पीठ आपस में जुड़ी हो। इस जुड़ी गणेश प्रतिमा को मुख्य द्वार के बीचों-बीच चौखट पर फिक्स कर दें, ताकि एक गणेशजी अंदर को देखें और एक बाहर को। माना जाता है कि श्रीगणेश के सम्मुख शुभ और पीछे दरिद्रता होती है, लेकिन दोनों ही तरफ श्री गणेश ही होने से सभी ओर शुभ ही होता है।
6. उत्तर-पूर्व में कैसा भी दोष हो : यदि उत्तर-पूर्व यानि ईशान दिशा में किसी भी प्रकार का दोष है तो आप इस दिशा को खाली करके इस दिशा में एक पीतल के बर्तन में जल भरकर रख दें या तुलसी का पौधा लगाकर उसमें नित्य जल देते रहें। पीतल के बर्तन का पानी नित्य बदलते रहें।
7. सुंदर कांड या रामचरित का पाठ : घर के वास्तु दोष को दूर करने के लिए समय समय पर रामचरित का पाठ या सुंदरकांड का पाठ करवाते रहें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकाल जाएगी।
8. किसी भी प्रकार का वास्तु दोष : घर में किसी भी प्रकार से वास्तु दोष है तो घर को स्वास्तिक चिन्ह सहित पौधों से सजाएं। घर में पीले, गुलाबी और हल्के नीले रंग का उपयोग करें। दक्षिण की दिशा में भारी सामान रखें जैसे लोहे की अरमारी, पलंग, फ्रीज आदि। वहीं कई वास्तु दोष के मामलों में घर की वस्तुओं के स्थान को बदलकर भी इसे ठीक किया जा सकता है।
9. एक साथ - बाथरूम और टॉयलेट : यदि घर में बाथरूम और टॉयलेट एक साथ हों तो यह भी भयंकर वास्तु दोष उत्पन्न करता है। इसके लिए सबसे पहले आप इसे हमेशा स्वच्छ रखें। नीले रंग के मग और बाल्टी ही रखें।
एक कटोरे में खड़ा नमक भरकर बाथरूम-टॉयलेट के किसी कौने में रखें। यदि गलती से आपका शौचालय ईशान कोण में बन गया है तो फिर यह बहुत ही धनहानि और अशांति का कारण बन जाता है। प्राथमिक उपचार के तौर पर उसके बाहर शिकार करते हुए शेर का चित्र लगा दें।
10. शयन कक्ष : सिर हमेशा पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर ही रखना चाहिए। वैसे तो दक्षिण-पश्चिमी दिशा में होना चाहिए या उत्तर दिशा भी ठीक है लेकिन यदि शयन कक्ष अग्निकोण में हो तो पूर्व-मध्य दीवार पर शांत समुद्र का चित्र लगाना चाहिए।
जब घर पहले से बना हो और बाद में वास्तु दोष का पता लगे। ऐसे में घर को तोड़ कर दोबारा से बदलाव करके बनवाना संभव नहीं होता। लेकिन वास्तु दोष दूर करना भी बहुत जरूरी होता है। इन वास्तु दोषों को आप बिना किसी तोड़-फोड़ के इन उपायों से दूर कर सकते हैं।
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1. गलत दिशा में रखा हो बेड- अगर आपका डबलबेड गलत दिशा में रखा हुआ है और आप उसकी दिशा नहीं बदल सकते हैं तो अपने बेड के सामने एक शीशा लगा दें, इससे वास्तु दोष दूर हो जाता है।
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2. सही दिशा में ना हो किचन- वास्तु के अनुसार घर के आग्नेय कोण में किचन बनाना सही होता है लेकिन अगर आपका किचन किसी और दिशा में हो तो आप इस वास्तु दोष को दूर करने के लिए इस दिशा में गैस रख लें या फिर इस दिशा में एक पीले रंग का बल्ब लगा दें और इस बल्ब को हमेशा जलने दें।
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3. घर की पूर्व दिशा का भाग हो सबसे ऊंचा- अगर आपके घर के पूर्व दिशा का भाग घर के दूसरे भागों के मुकाबले सबसे ऊंचा हो तो इस पूर्व दिशा में लोहे का एक पाइप लगा दें या फिर घर के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में ठोस सामान और उत्तरी-पूर्वी भाग में हल्का सामान रख दें।
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4. मुख्य द्वार की दिशा हो गलत- अगर आपके घर का मुख्य दरवाज़ा गलत दिशा में हो तो उस दरवाज़े को गहरे लाल रंग से पेंट कर दें या फिर वहां लाल पर्दे लगा दें। ऐसा करने से वास्तु दोष दूर हो जाएगा।
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5. किचन के सामने हो बाथरूम का दरवाज़ा- वास्तु के अनुसार घर के बाथरूम का दरवाज़ा कभी भी घर के किचन की तरफ नहीं होना चाहिए। अगर आपके घर में ये वास्तु दोष हो तो बाथरूम और किचन के बीच एक पर्दा लगा दें जिससे कि वह एक दीवार का काम करे और दोनों एक-दूसरे के सामने दिखाई ना दें।
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Thursday, 3 December 2020
कौन सी दिशा में मिलेगी सफलता
Friday, 9 October 2020
बांझपन प्रजनन क्षमता बढ़ाने के टोटके
बांझपन (प्रजनन क्षमता बढ़ाने) के घरेलू उपाय - Home Remedies for Infertility in Hindi
इनफर्टिलिटी या बांझपन एक ऐसा विषय है जिसके बारे में लोग खुलासा करने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि समाज उनकी मर्दानगी या स्त्रीत्व पर संदेह करेगा और सवाल उठाएगा। इसके कारण कई जोड़े इस समस्या के बारे में बात करने में संकोच करते हैं और 2-3 वर्षों तक इंतजार करते हैं। जब समय उनकी स्थिति को सही करने में असमर्थ हो जाता है तो वे आखिरकार डॉक्टर से सलाह लेते हैं। इस समस्या में आप शुरुआती अवधि के दौरान घरेलू उपचार की कोशिश कर सकते हैं जो न केवल प्राकृतिक हैं बल्कि काफी सरल भी हैं। लेकिन याद रखिए इनफर्टिलिटी एक गंभीर समस्या है। इसके लिए आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। आप जितनी देर करेंगे, स्थिति उतनी ही खराब होती जाएगी। इसलिए जितना जल्दी हो आप उपचार शुरू करें। आप कुछ सरल घरेलू और आयुर्वेदिक उपायों का पालन करके उपचार प्रक्रिया को और तेज़ कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इनफर्टिलिटी से छुटकारा पाने के इन उपायों के बारे में:-
- बांझपन दूर करने का उपाय है दालचीनी - Banjhpan ko dur karne ka upay hai cinnamon in hindi
- फर्टिलिटी बढ़ाने का उपाय है अनार - Fertility badhane ke tarike me kare pomegranate ka upyog in hindi
- प्रजनन क्षमता बढ़ाएं तिल के तेल से - Fertility badhane ke liye kare sesame oil ka upyog in hindi
- महिला बांझपन का उपाय है बरगद - Fertility badhane ka gharelu upay hai banyan tree in hindi
- पुरुष बांझपन से छुटकारा पाने का तरीका है लहसुन - Mardana banjhpan se chutkara pane ka tarika hai garlic in hindi
- बांझपन को दूर करने के घरेलू नुस्खे में करे कापीकच्चू का उपयोग - Banjhpan ko dur karne ke gharelu nuskhe kare kapikachhu se in hindi
- बांझपन दूर करने का उपाय है अश्वगंधा चूर्ण - Infertility ka upay hai ashwagandha powder in hindi
- प्रजनन क्षमता में वृद्धि करता है गोखरू - Fertility ko badhane ka upay hai gokshura in hindi
- महिलाओं में फर्टिलिटी बढ़ाने का तरीका है शतावरी - Female infertility badhane ka upay hai shatavari in hindi
- बांझपन दूर करे लोध्रा से - Infertility dur karne ke upay kare lodhra se in hindi
- बांझपन के घरेलू उपाय में करे अशोक का उपयोग - Banjhpan ko dur karne ka upay hai ashoka in hindi
बांझपन दूर करने का उपाय है दालचीनी - Banjhpan ko dur karne ka upay hai cinnamon in hindi
पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम सबसे आम हार्मोनल विकार है जिसमें अंडाशय (महिलाएं) या वृषण (पुरुषों में) संतुलन से बाहर हो जाते हैं और प्रजनन अंगों के कार्य में बाधा डालते हैं। मासिक धर्म के दौरान यह अत्यधिक रक्तस्राव का भी कारण बनते हैं। दालचीनी का इस्तेमाल मासिक धर्म चक्र को नियमित करने के लिए महिलाओं द्वारा किया जाता है। दालचीनी न केवल हार्मोनल विकार का इलाज करती है बल्कि महिलाओं को गर्भधारण करने में मदद करती है। इसके लिए आप एक कप गर्म पानी में एक चम्मच दालचीनी पाउडर को मिलाकर प्रतिदिन इसका सेवन करें। आप चाहें तो स्वाद के लिए शहद भी मिला सकते हैं। या फिर आप अपने भोजन के रूप में भी इसका सेवन कर सकते हैं। याद रखें, इस पाउडर का प्रतिदिन 2 चम्मच से अधिक सेवन नहीं करें। (और पढ़ें – बांझपन के इलाज के लिए चेस्टबेरी)
फर्टिलिटी बढ़ाने का उपाय है अनार - Fertility badhane ke tarike me kare pomegranate ka upyog in hindi
अनार पोषक और औषधीय गुणों से भरा हुआ है। यह महिलाओं के बांझपन के लिए एक शक्तिशाली घरेलू उपचार के रूप में उपयोग किया जाता है। बांझपन में इसकी प्रभावकारिता की मात्रा इस तथ्य से प्रमाणित होती है कि प्राचीन पर्शिया (Persia) में अनार प्रजनन के प्रतीक के रूप में देखा जाता था। अनार का सेवन उस क्षेत्र में रक्त के प्रवाह को बढ़ाकर गर्भाशय को पोषण देता है और गर्भाशय के स्तर को मोटा बनाता है और भ्रूण को पोषण करने के लिए पर्याप्त शक्ति प्रदान करता है। इसके लिए आप प्रतिदिन ताजा अनार खा सकते हैं या प्रतिदिन दो बार एक कप अनार का जूस पी सकते हैं। लेकिन इसके अधिक सेवन से बचें। अनार पुरुषों के शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने और प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए भी उपयोगी है। (और पढ़ें – महिलाओं और पुरुषों को यौन विकारों से बचना है)
प्रजनन क्षमता बढ़ाएं तिल के तेल से - Fertility badhane ke liye kare sesame oil ka upyog in hindi
तिल का तेल ओवुलेशन (ovulation) में बहुत लाभदायक है। प्रतिदिन तिल के तेल को गर्म करके पेट की मालिश करने से गर्भाशय में ऑक्सीजन के प्रवाह में सुधार होता है और महिलाओं को अधिक उपजाऊ बनने में मदद मिलती है। अच्छे परिणाम के लिए मालिश के बाद स्नान करना चाहिए। वीर्य की मात्रा बढ़ाने और शुक्राणुओं की गुणवत्ता और गतिशीलता बढ़ाने के लिए भी तिल का सेवन प्रभावी होता है। (और पढ़ें – गर्भाशय की समस्याओं से भी बचाता है मोरिंगा )
महिला बांझपन का उपाय है बरगद - Fertility badhane ka gharelu upay hai banyan tree in hindi
बांझपन से लड़ने के लिए बरगद के पेड़ की छाल का पाउडर आयुर्वेद में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यह प्रजनन अंगों के विकारों को ठीक करता है और प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है। बरगद के पेड़ की छाल को अच्छी तरह से पीसकर दो चम्मच पाउडर को गर्म दूध या पानी में डाल कर लें। आप स्वाद के लिए चीनी मिला सकते हैं। अच्छे लाभ के लिए आप सुबह खाली पेट लगभग 6 महीनों के लिए इसका सेवन करें। मासिक धर्म के समय इसका सेवन नहीं करें। (और पढ़ें – मूंगफली खाने के फायदे बढ़ाएं प्रजनन शक्ति के लिए)
पुरुष बांझपन से छुटकारा पाने का तरीका है लहसुन - Mardana banjhpan se chutkara pane ka tarika hai garlic in hindi
लहसुन में एलिसिन पाया जाता है जो शुक्राणु की मात्रा और गुणवत्ता को भी बढ़ाने में मदद करता है। यह एक प्राकृतिक कामोद्दीपक के रूप में कार्य करता है और शरीर में कामेच्छा का स्तर बढ़ाता है और इसलिए यौन इच्छा बढ़ती है। इसके लिए आप अपने भोजन में सिर्फ 2 लहसुन की कलियों का उपयोग करें। बेहतर परिणाम के लिए रोज सुबह कच्चे लहसुन की 2 कलियों का सेवन करें। (और पढ़ें – गुडहल के उपयोग मासिक धर्म में)
बांझपन को दूर करने के घरेलू नुस्खे में करे कापीकच्चू का उपयोग - Banjhpan ko dur karne ke gharelu nuskhe kare kapikachhu se in hindi
कपिकच्छु शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करता है। पुरुषों की वीर्य मात्रा को बढ़ाने के अलावा यह पुरुषों की प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है। यह कामोत्तेजक के रूप में कार्य करता है और पुरुषों में कामेच्छा स्तर को बढ़ा कर यौन इच्छा बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा यह पुरुषों के प्रजनन अंग के निर्माण (men’s erection) से संबंधित समस्याओं के लिए एक शक्तिशाली उपाय है। पुरुषों के स्वास्थ्य में इसकी बहुमुखी प्रतिभा के कारण, पुरुषों में बांझपन का इलाज करने के लिए आयुर्वेद में इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। कपिकच्छु बीज के पाउडर को 250-500 मिलीग्राम प्रतिदिन भोजन के बाद दो बार लें।
(और पढ़ें – शुक्राणु बढ़ाने के उपाय)
बांझपन दूर करने का उपाय है अश्वगंधा चूर्ण - Infertility ka upay hai ashwagandha powder in hindi
अल्पजननग्रंथिता (Hypogonadism) बांझपन के प्रमुख कारणों में से एक है। इस स्थिति में पुरुष का टेस्टेस (testes) ठीक से काम नहीं करता और टेस्टोस्टेरोन (testosterone) हार्मोन के बनने को रोकता है। अश्वगंधा एक बहुत ही लोकप्रिय आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। यह उन मनुष्यों के लिए बहुत अच्छी है जो इस विकार से ग्रसित हैँ। यह शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाती है और इसकी गुणवत्ता और गतिशीलता में सुधार करती है। व्यापक रूप से एक प्राकृतिक अनुकूलन (adaptogen) के रूप में प्रयोग की जाती है और तनाव से राहत दिलाने में मदद करती है। यह महिला बांझपन में भी उपयोगी है। आप रोजाना 5 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को गर्म दूध के साथ ले सकते हैं। आप चाहें तो इसकी खुराक को प्रतिदिन कई बार में भी ले सकते हैं।
(और पढ़ें - यौन-शक्ति को बढ़ाने वाले आहार)
प्रजनन क्षमता में वृद्धि करता है गोखरू - Fertility ko badhane ka upay hai gokshura in hindi
गोखरू एक प्रभावी कामोद्दीपक (Aphrodisiac) के रूप में कार्य करता है और शरीर में कामेच्छा (सेक्स की इच्छा) के स्तर को बढ़ाता है। यह वीर्य (semen) की मात्रा को बढ़ाने और इसकी गुणवत्ता में भी सुधार लाने में बहुत फायदेमंद है। यह यौन अंग में रक्त-प्रवाह को बेहतर बनाता है और टेस्टोस्टेरोन (testosterone) के स्तर को जागृत करने में मदद करता है। सिंथेटिक दवाओं के विपरीत यह शरीर में हार्मोन के प्राकृतिक उत्पादन को उत्तेजित करता है और बेहतर सेक्स जीवन को प्राप्त करने में मदद करता है। इसका सेवन बांझपन जैसे यौन विकार में मदद करता है। इसके लिए आप गोक्षुरा चूर्ण के 200-300 मिलीग्राम का रोज 2-3 महीने तक सेवन करें।
(और पढ़ें - sex karne ka tarika)
महिलाओं में फर्टिलिटी बढ़ाने का तरीका है शतावरी - Female infertility badhane ka upay hai shatavari in hindi
शतावरी महिलाओं के लिए एक अच्छा यौन (sexual) टॉनिक है। यह महिलाओं के बांझपन के लिए सर्वश्रेष्ठ जड़ी-बूटियों में से एक माना जाता है। शतावरी का 'शुक्र धरू' या प्रजनन के ऊतकों के स्वास्थ्य पर बहुत सकारात्मक प्रभाव दिखता है। इसलिए इसका उपयोग गर्भधारण करने के तरीके को आसान बनाने में सहायक है। यह महिलाओं के अंडाणु को पोषण करके उनकी यौन इच्छा और प्रजनन क्षमता में सुधार करता है। यह एस्ट्रोजन (estrogen) हार्मोन उत्पादन को बढ़ाता है और मासिक धर्म को नियंत्रित करता है। यह एक अच्छा प्राकृतिक अनुकूलन (adaptogen) भी है जो तनाव को काम करता है जो महिलाओं के बांझपन का कारण हो सकता है। शतावरी पाउडर को 1-2 ग्राम प्रतिदिन दो बार लें।
(और पढ़ें – पीपल के फल के फायदे बांझपन और नपुंसकता में)
बांझपन दूर करे लोध्रा से - Infertility dur karne ke upay kare lodhra se in hindi
गर्भाशय से सम्बंधित विकारों या अंडा उत्पादन की समस्या के कारण महिलाओं में बांझपन की समस्या होती है। इसलिए महिलाओं को बांझपन की समस्या से छुटकारा दिलाने में लोध्रा (Lodhra) का उपयोग किया जाता है। यह मासिक धर्म चक्र के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव को रोकता है और प्रजनन हार्मोन के उत्पादन को बढाता है। यह लगभग सभी प्रकार के योनि संक्रमण को ठीक करता है और इसके स्वास्थ्य को बढ़ाता है। यह अंडाशय को पोषण देता है और गर्भ धारण करने की संभावना को बढ़ाता है। इसके लिए लोध्रा की छाल को अच्छी तरह से पीसकर 1-3 ग्राम रोजाना लें।
(और पढ़ें – पुत्रजीवक बीज बेनिफिट्स महिलाओं में बांझपन के लिए)
बांझपन के घरेलू उपाय में करे अशोक का उपयोग - Banjhpan ko dur karne ka upay hai ashoka in hindi
अशोक महिला प्रजनन अंगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी जड़ी बूटी है। यह केवल बांझपन की ही समस्या में मदद नहीं करता है, बल्कि यह मासिक धर्म की समस्याओं और ल्यूकोरिया (leucorrhoea) के लिए भी बहुत अच्छा है। यह अंडाणु को पोषित करता है और उसे उपजाऊ (fertile) बनने में मदद करता है। यह व्यापक रूप से गर्भाशय या गर्भ की आंतरिक रेखा को पोषण देता है और गर्भाशय को गर्भधारण के लिए स्वस्थ बनाता है। यह अत्यधिक रक्तस्राव को रोकता है और मासिक धर्म संबंधी समस्याओं के कारण बांझपन की समस्या से महिलाओं को छुटकारा दिलाने में मदद करता है। इस जड़ी-बूटी का अच्छे से पाउडर बनाएं और प्रतिदिन नाश्ते और रात के खाने से एक घंटे पहले एक चम्मच गाय के दूध के साथ इसका सेवन करें।
(और पढ़ें – मासिक धर्म जल्दी लाने के सबसे अच्छे उपाय)
Thursday, 8 October 2020
Cancer Rog or Vastu upachar
घर में वास्तु की इन गलतियों से भी हो सकता है अलग-अलग कैंसर, कुंडली से भी है संबंध
1/13कर्क राशि और कैंसर रोग में है यह संबध

ज्योतिषविद्या के माध्यम से शरीर के किस अंग में कैंसर रोग होने की संभावनाएं बनती हैं, जीवन के किस आयु और किस भाग में कैंसर होगा और जीवन बचेगा या नहीं, ये सभी जानकारी कुंडली के माध्यम से पता कर सकते हैं। दरअसल मनुष्य के शरीर में कैंसर के लिए कोशिकाओं की अनियंत्रित वॄद्धि की भूमिका महत्वपूर्ण रहती हैं। शरीर की श्वेत रक्त कणिकाओं का सूचक चंद्र और लाल रक्त कणों का सूचक मंगल हैं। इस रोग का स्वामी ग्रह ज्योतिष में कर्क राशि को कहा गया है। ज्योतिष में कैंसर रोग का कारण राहु ग्रह को माना गया है। यदि राहु कर्क राशि में पाप कर्तरी योग में स्थित हो तो इस रोग की आशंका रहती है।
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2/13इन ग्रहों की होती है कैंसर रोग में महत्वपूर्ण भूमिका

कैंसर रोग को कुंडली से समझने में कर्क राशि, चंद्र और मंगल इन सभी की भूमिका अहम होती हैं। हमारे शरीर में कैंसर के सभी प्रकार होने की आशंका रहती है जैसे कैंसर, महिलाओं में स्तन कैंसर, ल्यूकेमिया, फेफड़े का कैंसर और महिलाओं में गर्भाशय का कैंसर, पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर।
3/13जन्मकुंडली से इस तरह कर सकते कैंसर की पहचान

कर्क राशि, चंद्र और मंगल पर शनि, राहु व मंगल इनमें से किसी ग्रह का अशुभ प्रभाव होने पर कैंसर रोग होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। कई बार जन्मकुंडली में रोग होने की आशंकाएं रहती हैं पंरतु शुभ ग्रहों की दशा और अनुकूल ग्रहों की दशा होने पर रोग के प्रभावी होने की संभावनाएं रहती हैं। यह सही है कि ज्योतिष के अनुसार उपरोक्त ग्रह और राशि इस रोग के कारण बनते हैं परंतु राहु को भी कैंसर का कारक माना गया है। इसके साथ ही शनि और मंगल भी पीड़ित होने पर यह रोग दे सकता है।
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4/13ये हैं कैंसर रोग के ज्योतिषीय कारण

ज्योतिष शास्त्र में राहु को अत्यंत क्रूर यानी जहर कारक ग्रह माना जाता है। यदि जन्मकुंडली में राहू लग्न, लग्नेश से संबंध हो जाएं या राहू कर्क राशि में पीड़ित होकर रहे तो शरीर में विष बढ़ता रहता है। त्रिक भावों के स्वामी जिसमें 6वें, 8वें और 12वें भाव का स्वामी जब राहु से पीड़ित हों तो शरीर में कैंसर रोग होने के योग प्रबल हो जाता है। यदि बारहवें भाव में शनि और मंगल एक साथ हों या शनि व राहु की युति अथवा शनि के साथ केतु का योग बन रहा हों तो व्यक्ति को कैंसर रोग होने की आशंक रहती है।
5/13यदि बुध क्रूर ग्रहों के साथ मिल जाए तो

6/13कर्क लग्न वालों को भी है सचेत रहने की जरूरत

लग्न और रोग भाव में जितने अधिक अशुभ ग्रह हों जैसे राहु व शनि हों तो जातक को असाध्य रोग होने की आशंका अधिक रहती हैं। 12 लग्नों में से कैंसर रोग होने की आशंका कर्क लग्न और कर्क राशि के लोगों को सबसे अधिक रहती हैं। जिन व्यक्तियों की कुंडली कर्क लग्न की हो, उन व्यक्तियों को गुरु ग्रह कैंसर रोग देने वाला ग्रह होता है।
7/13कैंसर रोग और वास्तु का संबंध

आजकल जिस तरह के घर बन रहे हैं, ये पहले के घरों जैसे आयताकार नहीं होते हैं बल्कि आधुनिक समय के हिसाब से अनियमित आकार के होते हैं। ऐसे में वर्तमान दौर में बनने वाले घरों का कोई कोना या तो दबा होता है या फिर बाहर निकला होता है, घर का कोई भाग ऊंचा तो कोई भाग नीचा रह जाता है। इस तरह की बनावट अनियमित मानी जाती है। वास्तुशास्त्र की मानें तो इस वजह से घर में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के बीच असंतुलन पैदा हो जाता है। इसी कारण घर में रहने वाले लोगों की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। ऐसे रोगों में कैंसर रोग भी शामिल है।
8/13घर में इस जगह हो सकता है कैंसर का वास्तुदोष

वास्तुशास्त्र के मुताबिक, जिन लोगों में कैंसर की बीमारी होती है उनके घरों में कम से कम 2 वास्तु दोष होने की प्रबल संभावना होती है। इसके अलावा ध्यान देने की बात यह है कि दो वास्तुदोषों में से एक वास्तुदोष ईशान कोण वाले भाग में जरूर होता है, जैसे- घर का ईशान कोण गोल होना, कटा हुआ होना, दबा हुआ होना या जरुरत से ज्यादा ईशान कोण का बढ़ा हुआ होना या घर की अन्य दिशाओं की तुलना में ईशान कोण का ऊंचा होना। इस तरह के वास्तुदोष वाले घरों में कैंसर के रोगी होने की अधिक आशंका रहती है।
9/13वास्तुदोष इस तरह कैंसर के लिए जिम्मेदार

इसके अलावा शरीर के किस में कैंसर होगा यह घर के दूसरे वास्तुदोष पर निर्भर करता है जो हमारे घर की दक्षिण पश्चिम दिशा में या आग्नेय, वायव्य और नैऋत्य कोण में कहीं होता है।
10/13गर्भाशय कैंसर दे सकता है इस जगह वास्तुदोष होना

वास्तुशास्त्र के अनुसार, महिलाओं को गर्भाशय का कैंसर तब होता है जब घर के दक्षिण या दक्षिण नैऋत्य में भूमिगत पानी का स्रोत होता है। इसके अलावा अगर घर के दक्षिण या दक्षिण नैऋत्य का भाग किसी भी प्रकार से नीचा या बढ़ा हुआ होता है। गर्भाशय कैंसर के लिए पूर्व आग्नेय भाग में भूमिगत पानी का स्रोत जैसे टंकी, बोर, कुंआ इत्यादि का होना या नीचा होना, ऐसे वास्तुदोष भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
11/13गले,सिर और मुंह का संबंध है इस वास्तुदोष से

यदि घर में ईशान कोण आवश्यकता से अधिक ऊंचा और बढ़ा हुआ है होना और पश्चिम दिशा किसी भी प्रकार से अधिक नीचा है तो ऐसे घर के लोगों में सिर, गले व मुंह का कैंसर होने की आशंका रहती है।
12/13ब्रेन कैंसर दे सकता है यह वास्तुदोष

वायव्य, उत्तर, ईशान व पूर्व दिशा का ऊंचा होना एवं आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम में भूमिगत पानी का स्रोत होना या नीचा होना या फिर बढ़ा हुआ होना ब्रेन कैंसर की संभावना को बढ़ाता है।
13/13यहां है वास्तुदोष तो हो सकता है ब्लड और आंत में कैंसर
पश्चिम नैऋत्य में भूमिगत पानी का स्रोत होना या किसी भी प्रकार से नीचा या बढ़ा हुआ होना आंत में कैंसर का कारण माना जाता है। नैऋत्य में भूमिगत पानी का स्त्रोत होना, नैऋत्य बहुत नीचा होना या बढ़ा हुआ होना, साथ ही अन्य दिशाएं ईशान कोण की तुलना में नीची होना। अन्य दिशाओं की तुलना में ईशान कोण ऊंचा होने वास्तुविज्ञान के अनुसार ब्लड कैंसर का कारण माना जाता है।
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